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Sirsa News: उत्तर भारत के प्रसिद्ध गोगामेड़ी मेले का हुआ विधिवत समापन

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चोपटा। मेले में सवारी के लिए आए ऊंट । संवाद
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चोपटा। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर श्री गोगाजी गोगामेड़ी मेले का रविवार को भाद्रपद पूर्णिमा पर औपचारिक समापन हुआ। इसके साथ ही पशु मेला का भी समापन किया गया। इस वर्ष मेले में पंजाब में आई बाढ़ के कारण दूसरे पखवाड़े में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ घटी, फिर भी लगभग 20 लाख श्रद्धालु गोगामेड़ी पहुंचकर जाहरवीर गोगाजी के दर्शन किए।
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भादरा विधायक संजीव बेनीवाल ने देवस्थान विभाग की ओर से पहली बार लगे रैन बसेरे की व्यवस्था की तारीफ की, अगले वर्ष और अधिक बजट लाने की घोषणा की। मेला मजिस्ट्रेट राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। गोगामेड़ी मेले आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, सुचारु व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी धार्मिक और सामाजिक के संस्थानों ने अच्छा सहयोग दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की भांति इस बार राजकीय कोष अधिक आई हुई है। समापन अवसर पर नोहर अतिरिक्त जिला कलक्टर संजू पारीक, नोहर उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव व भादरा एसडीएम कल्पित श्योराण, गोरखटीला प्रन्यास के पीठाधीश्वर और ग्राम प्रशासक महंत रूपनाथ, पूर्व सरपंच और मेला ठेकेदार मांगूसिंह गोगामेड़ी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
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तीन करोड़ से ज्यादा की हुई मेले में आय
आय के मामले में इस बार रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। दानपात्रों व रसीदों से पिछले वर्ष 2.12 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इस बार यह बढ़कर 3.09 करोड़ रुपये (7 सितंबर तक की गणना अनुसार) हो गई है। अभी 20 से 25 लाख रुपये की राशि की गणना शेष है। अस्थायी भूखंडों एवं अन्य स्रोतों से हुई आय को मिलाकर अब तक कुल आय 8.87 करोड़ रुपये दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 7.71 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है।
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यह की गई थी व्यवस्था
- मंदिर परिसर में लगभग 850 फीट स्थायी स्टील बैरिकेडिंग बनाई गई।
- समाधि के दर्शन के लिए तीन बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई।
- प्रतिदिन तीन हजार यात्रियों की क्षमता वाले जर्मन हैंगर युक्त रैन बसेरे तैयार किए गए।
- रैन बसेरों में विश्व मानव रूहानी केंद्र की ओर से निशुल्क चिकित्सालय संचालित किया गया।

चोपटा। मेले में सवारी के लिए आए ऊंट । संवाद

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