रैन बसेरे के गेट पर जड़ा हुआ ताला।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। राहगीरों व खुले में सोने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने लाखों रुपये की लागत से रैन बसेरा बनवाएं हैं। इनमें तीन हॉल, बाथरूम, किचन सहित अन्य सभी जरूरी सुविधाएं प्रशासन ने उपलब्ध करवा रखी है। बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर रैन बसेरा पटेल बस्ती में बनाया गया है। लेकिन कर्मचारियों की उदासीनता के चलते इसका फायदा जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। ठंड होने लगी है लेकिन रैन बसेरे पर ताला लटका है। इसके चलते जरूरतमंद लोग खुले आसमान के नीचे सर्द रातों में सोने को मजबूर हैं।
रात के तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। ऐसे में मुसाफिरों को यह सर्द रातें या तो बस स्टैंड पर गुजारनी पड़ रही है या फिर किसी पार्क में। अधिकारियों की ओर से इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। जबकि मुसाफिरों के ठहरने के लिए रैन बसेरा में हर तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। सर्दियों की शुरूआत के साथ ही सामाजिक संस्थाएं सक्रिय हो जाती हैं और खुले में सोने वाले व्यक्तियों के पास जाकर उन्हें गर्म वस्त्र वितरित किए जाते हैं। रैन बसेरा का संचालन नगर परिषद करती है, लेकिन अभी तक नगर परिषद अधिकारियों ने रैन बसेरा खोलने पर विचार तक नहीं किया। रैन बसेरे में ताला जड़ा हुआ है और अंदर काफी गंदगी फैली हुई है। रविवार शाम को रैन बसेरे के पास मिले सुभाष चंद्र व नरेंद्र शर्मा ने बताया कि सरकार ने यह रैन बसेरा जरूरतमंदों के लिए बनाया है। ताकि वे यहां मजबूरी में रात गुजार सकें और ठंड से बचाव कर सकें।
रैन बसेरा में मुसाफिरों के ठहरने के लिए प्राप्त प्रबंध है। जल्द ही व्यवस्था में सुधार कर दिया जाएगा। मुसाफिरों को ठहराने के लिए पूरी तैयारियों की जा रही है। जो कमी है दूर कर दी जाएगी।
-राजकुमार, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद सिरसा