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हरियाणा: सिरसा की समस्याओं को लेकर विधायक सेतिया ने सीएम नायब सैनी को घेरा, फेसबुक पर पोस्ट डालकर लिखा...

Sat, 19 Sep 2026 12:46 PM IST
Naveen संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

विधायक सेतिया ने अपनी पोस्ट में पंजाबी में कहा कि सानु एसतो चंगा किसे होर स्टेट च ही पादो, जे तूसी सानु हरियाणा दा हिस्सा नी समझना तां। यानि यदि सिरसा को हरियाणा का हिस्सा नहीं समझा जा रहा है तो उसे किसी दूसरे राज्य में डाल देना चाहिए।
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सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठकों की कार्यप्रणाली को लेकर सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर सवाल उठाए हैं। विधायक ने शुक्रवार रात फेसबुक पर पोस्ट डालकर आरोप लगाया कि सिरसा में लोगों की समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो रहा और विभिन्न विभागों में कार्यों में देरी हो रही है।

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विधायक गोकुल सेतिया ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यदि उन्होंने एम्स सिरसा मिलने पर मंच पर जाकर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया था तो आज वह सिरसा की स्थिति को लेकर भी अपनी बात कह रहे हैं।  आज तक इतना बेड़ागर्क सिरसा का कभी नहीं हुआ। जितना अब हो रहा है और आप यहां के ग्रीवांस के चेयरमैन है मुख्यमंत्री साहब।

डीएमसी साहब शहर में फोटो शूट पर और काम जीरो, एडीसी साहब के पास ग्रांट नहीं सिर्फ जी विधायक जी, बिजली महकमे वाले बेलगाम, पब्लिक हेल्थ को तो श्राप है कोई काम ढंग से होना ही नहीं, ना नहरों में पानी, तहसील में सब अफसर बीमार। बेड़ागर्क हुआ पड़ा है यहां का और ग्रीवांस के चेयरमैन मुख्यमंत्री जी हैं।
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विधायक सेतिया ने अपनी पोस्ट में पंजाबी में कहा कि सानु एसतो चंगा किसे होर स्टेट च ही पादो, जे तूसी सानु हरियाणा दा हिस्सा नी समझना तां। यानि यदि सिरसा को हरियाणा का हिस्सा नहीं समझा जा रहा है तो उसे किसी दूसरे राज्य में डाल देना चाहिए।

गौरतलब है कि पहली ग्रीवेंस बैठक में सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया, कालांवाली विधायक शीशपाल सिंह केहरवाला और ऐलनाबाद विधायक के प्रतिनिधि सुमित बेनीवाल अपनी शिकायतों के साथ पहुंचे थे। इसके बाद की बैठकों में विधायकों की मौजूदगी को लेकर अलग स्थिति रही है। 12 सितंबर की बैठक से  पंचायत भवन परिसर के पार्क में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे। इस दौरान कई शिकायतकर्ताओं को बैठक स्थल के अंदर प्रवेश नहीं मिला। बैठक के दौरान केवल निर्धारित शिकायतकर्ताओं को ही हॉल में प्रवेश मिलता है, जबकि अन्य लोग अपनी समस्याएं लेकर बाहर रह जाते हैं।  मुख्यमंत्री के जाने के बाद बाहर मौजूद लोगों से शिकायतें तो ले ली जाती हैं, लेकिन उनके मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती।

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