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Sirsa News: प्रबंधन ने दिलाई विभाग को कामयाबी, पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी कम जली पराली

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सिरसा। जिले में पराली प्रबंधन को लेकर किसानों और कृषि विभाग का आपसी तालमेल कारगर साबित हुआ है। जिसके कारण इस बार जिले में पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी कम पराली जली है। पिछले वर्ष 356 जगहों पर जली थी पराली, इस बार अब तक 163 मामले आए सामने आए हैं।
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पराली प्रबंधन को लेकर इस बार कृषि विभाग ने किसानों के साथ मिलकर उनकी हर समस्या का समाधान करने के भरसक प्रयास किए हैं। जिसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। पिछले साल 356 के मुकाबले अबकी बार 163 मामले ही सामने आए हैं, जबकि धान का पूरा सीजन जा चुका है। यहां तक की 70 फीसदी गेहूं व अन्य फसलों की बिजाई भी हो चुकी है।
विभाग के अधिकारियों की माने तो हरसेक की 40 फीसदी लोकेशन गलत पाई गई है। ऐसे में पराली जलाने का आंकड़ा 30 से 35 फीसदी के आसपास रहा जाता है। जो प्रशासन और किसानों दोनों के लिए राहत की खबर है। ऐसे में इस बार विभाग ने अगले वर्ष को लेकर पहले से ही प्लानिंग बनानी शुरू कर दी है, ताकि जिन एरिया में पराली जलाने के मामले आखिरी दो सप्ताह में देखने को मिले हैं, वैसे मामले अगले वर्ष न आए।
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जिले में पराली प्रदूषण को नियंत्रण करने में कृषि विभाग को बड़े स्तर पर सफलता मिली है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी उपलब्ध करवाना वरदान साबित हुआ है। इसके साथ ही पिछले वर्ष सरकार ने पराली प्रबंधन करने पर जिले में 10261 किसानों को 9 करोड़ 88 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि के स्वरूप दिए गए। वहीं इस बार भी 16 हजार के आसपास किसानों ने पराली प्रबंधन को लेकर रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों में पराली प्रबंधन को लेकर निरंतर जागरूकता आ रही है।

पराली जलाने के मामले
वर्ष 2021

कुल मामले - 640 मामले

किसानों को जुर्माना लगाया - 9 लाख रुपये



वर्ष 2022

कुल मामले : 356 मामले

जुर्माना : 4 लाख 62 हजार 500 रुपये।

वर्ष 2023
कुल मामले - 163
जुर्माना - दो लाख 25 हजार के करीब।
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यह गांव होंगे रेड जोन से बाहर
- नकोड़ा
- गोदलवाली
- कुंथला
- रक्ताखेड़ा
पट्टी कृपाल

विभाग ने यह की व्यवस्था तो मिली कामयाबी
- पराली खरीदने वाली फर्मों से सीधा संपर्क किया।
- प्राइवेट एजेंसी की मदद से किसानों को बेलर व अन्य मशीनरी समय पर पहुंचाई।
- पराली खरीदने वालों को बिना कोई शुल्क दिए, 6 माह के लिए जमीन निशुल्क दिलवाई।
- गोशालाओं के साथ कांटेक्ट किया।
- पराली खरीदने वाली पंजाब व राजस्थान के उद्योगों से संपर्क किया।
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यह है बदलाव के कारण
अधिकारियों की माने तो किसानों में प्रदूषण को लेकर जागरूकता आई है। किसान जलाने से ज्यादा पराली के इस्तेमाल के विकल्प खोज रहा है। इससे कुछ मुनाफा हो सके। ऐसी स्थिति में पराली की गांठ बनाने कर उसे बेचकर पैसा किसान कमा सकता है। सरकार भी एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि पराली किसान को प्रति एकड़ दे रही है। पराली की खरीद को लेकर ईंट भट्ठे के कारोबारी व अन्य प्रोडक्ट बनाने वाली एजेंसियां सामने आई हैं। राजस्थान से आने वाले व्यापारी भी पशुओं के चारे के रूप में पराली का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि किसानों की सोच में बदलाव आया है।


किसानों को मशीनरी उपलब्ध करवाने के साथ साथ जागरूक किया गया है। किसानों का पराली खरीदने वाले एजेंसियों के साथ तालमेल विभाग ने स्थापित किया था। इतना ही नहीं, किसानों को समय पर मशीनरी मिले, इसकी व्यवस्था भी विभाग ने इस बार की है। इसके अतिरिक्त पराली खरीदने वाले पराली को स्टोर कर सके, इसको लेकर लीज पर प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से जमीन मुहैया करवाई गई। वहीं गोशालाओं के साथ तालमेल कर उन्हें भी पराली प्रबंधन जोड़ा गया। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है कि पराली जलाने के मामलों में 50 फीसदी कटौती देखने को मिली।
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-डॉ. सुखदेव सिंह, उप निदेशक कृषि विभाग
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