सिरसा। जिले के किसान पराली का प्रबंधन कर पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। विभाग का दावा है कि जिले में पराली जलाने के घटनाओं में 50 फीसदी तक कमी आई है। इससे साथ ही बेलर व सुपरसीडर मशीनरी की भी मांग बढ़ी है। इस बार भी 3400 किसानों ने मशीनरी के लिए आवेदन किया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है।
जिले में पराली प्रदूषण को नियंत्रण करने में कृषि विभाग को बड़े स्तर पर सफलता मिली है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी उपलब्ध करवाना वरदान साबित हुआ है। इसके साथ ही पिछले वर्ष सरकार ने पराली प्रबंधन करने पर जिले में 10261 किसानों को 9 करोड़ 88 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि के स्वरूप दिए गए। बड़े स्तर पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का ही परिणाम है कि किसान पराली प्रबंधन की दिशा में कदम उठा रहे हैं। अब अक्तूबर माह में विभाग के अधिकारी नियमित रूप से गांवों में कैंप लगाकर किसानों पराली प्रबंधन के लिए जागरूक करेंगे।
विभाग के अधिकारियों की माने तो कई बड़े गांव जो वर्षों से पराली जलाने में रेड जोन में आते थे। अब ग्रीन जोन में आ गए हैं। हालांकि गांव ऐसे है जिनमें मशीनरी देने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है, उन गांवों पर इस साल विशेष रूप से फोकस किया जाएगा। ताकि जिले में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
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मशीनों की मांग
वर्ष 2022
बेलर - 91
सुपर सीडर - 534
इस वर्ष
आवेदन - 3400
बेलर की बुकिंग - 221
सुपरसीडर की बुकिंग - 1138
अन्य मशीनरी - 2041
पराली जलाने के मामले
वर्ष 2021
कुल मामले - 640 मामले
किसानों को जुर्माना लगाया - 9 लाख रुपये
वर्ष 2022
कुल मामले : 356 मामले
जुर्माना : 4 लाख 62 हजार 500 रुपये।
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यह गांव रेड से ग्रीन जोन में आए
- नगोडा
- गोदलवाली
- कुंथला
- रक्ताखेड़ा
- भंभूर
- अबूबशहर
- लोहगढ़
- केलनियां
- पट्टी कृपाल
- अभोली
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इन गांवों पर इस वर्ष विशेष फोक्स
कुताबढ, रोड़ी, जोधकां, करीवाला
यह है बदलाव के कारण
अधिकारियों की माने तो किसानों में प्रदूषण को लेकर जागरूकता आई है। किसान जलाने से ज्यादा पराली के इस्तेाल के विकल्प खोज रहा है। इससे की कुछ मुनाफा हो सके। ऐसी स्थिति में पराली की गांठ बनाने कर उसे बेचकर पैसा किसान कमा सकता है। सरकार भी एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि पराली किसान को प्रति एकड़ दे रही है। पराली की खरीद को लेकर ईंट भट्ठे के कारोबारी व अन्य प्रोडक्ट बनाने वाली एजेंसियां सामने आई हैं। राजस्थान से आने वाले व्यापारी भी पशुओं के चारे के रूप में पराली का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि किसानों की सोच में बदलाव आया है।
किसानों को मशीनरी उपलब्ध करवाने के साथ साथ जागरूक किया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप पिछले वर्ष 50 प्रतिशत पराली प्रदूषण कम हुआ है। इस वर्ष भी किसानों की बड़े स्त मशीनरी की मांग आई है। मशीनरी देने के साथ हम लोगों को जागरूक करेंगे। - वीर गोदारा, जेई , कृषि विभाग