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बिना परमिट व नियमों को ताक पर रख मंडी से धान का कर रहे उठान

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अनाज मंडी से ट्राली में लोड की गई धान की बोरियां। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। जिले की मंडियों से उठान कार्य केवल ट्रकों के माध्यम से किया जा सकता है लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ट्रैक्टर ट्रॉलियों से धान का उठान कार्य चल रहा है। इस पर ट्रक यूनियन पदाधिकारियों ने विरोध किया और रोकना शुरू कर दिया। पुलिस बुलाकर ट्रॉलियों के चालान भी कटवाए। एक ट्रैक्टर चालक दौड़ा ले गया लेकिन यूनियन नेता पीछा करते हुए फैक्टरी तक जा पहुंचे। बहस हुई और मामला कहासुनी तक भी जा पहुंचा। अवैध रूप से ट्रॉली में लदी धान की बोरियों के कारण यातायात पुलिस ने तीन ट्रैक्टर ट्रॉलियों का चालान किया।
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अनाज मंडी से धान की बोरियों का उठान करने के लिए ट्रकों को ही मान्य किया गया है। लेकिन जिले की अनाज मंडियों में ट्रैक्टर ट्रॉलियों से भी ट्रक जितनी बोरियों को लोड कर फैक्टरी में पहुंचाया जाता है। जिसके बाद भारत ट्रक यूनियन के राष्ट्रीय प्रभारी मंजीत सिंह बिट्टू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने मंजीत सिंह के हक मे फैसला सुनाया और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेज दिए। लेकिन इसके बाद भी जिले की अनाज मंडियों से फैक्टरी संचालक अपने निजी ट्रैक्टर ट्रॉलियों से धान का उठान कार्य करवा रहे हैं। ऐसे में शनिवार को भारत ट्रक यूनियन के राष्ट्रीय प्रभारी यूनियनों के सदस्यों को लेकर सिरसा की कपास मंडी के समक्ष पहुंचे और धान की बोरियों से लदी ट्रॉलियों को रुकवाना शुरू कर दिया और मामले की सूचना यातायात पुलिस व आरटीए विभाग को दी। तो यातायात पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और चालान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। ट्रैक्टर ट्रॉली को कॉमर्शियल रूप से उपयोग में लाने पर यातायात पुलिस ने करीब तीन ट्रैक्टर ट्रॉलियों के 10-10 हजार रुपये के चालान कर दिए। वहीं यातायात अतिरिक्त थाना प्रभारी होशियार सिंह ने जब ट्रैक्टर चालक से कमेटी के टोकन पास की जानकारी मांगी तो उसने इसके बारे में कोई जानकारी न होने का जवाब दिया।
चालाकी से ट्रैक्टर ट्रॉली भगा ले गया चालक तो फैक्टरी में यूनियन ने काटा बवाल
कपास मंडी के गेेट से गुजरने वाले एक ट्रैक्टर चालक को यूनियन की ओर से रोका गया तो चालक कुछ देर बाद ट्रैक्टर ट्रॉली को मौके से भगा ले गया और फैक्टरी में रोक दिया। जिसके बाद यूनियन के सदस्य भी पीछा करते फैक्टरी में पहुंच गए। यहां पर उन्होंने ट्रैक्टर के आगे कार लगा उसे रुकवा लिया और बवाल काटना शुरू कर दिया। करीब 20 मिनट तक फैक्टरी संचालक और ट्रक यूनियन के सदस्यों में बहस होती रही। यूनियन ने ट्रैक्टर चालक से उठान की गई पर्ची भी ले ली और उसे वापस कपास मंडी के गेट पर पहुंचाने की बात कहता रहा। तो फैक्टरी संचालकों ने इसके बाद ट्रैक्टर ट्रॉली से उठान कार्य न करने की बात कही।
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ट्रैक्टर चालक नहीं भरते कोई टैक्स
वहीं भारत ट्रक यूनियन के राष्ट्रीय प्रभारी मंजीत सिंह बिट्टू ने बताया कि कोर्ट की ओर से आदेश है कि ट्रैक्टर ट्राली को कॉमर्शियल रूप से इस्तेमाल में नहीं ला सकते। लेकिन इसके बाद भी ट्रॉली में 500 से अधिक धान की बोरियों को लोड किया जा रहा है। जोकि पूरी तरह से अवैध है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मार्केट कमेटी की ओर से टोकन काटने की प्रक्रिया बंद कर दी गई लेकिन ट्रैक्टर ट्रॉलियों से उठान कार्य करवाना बंद नहीं किया गया। जिससे सरकार को इसका काफी नुकसान हो रहा है। फैक्टरी संचालकों की ओर से खुद की ट्रैक्टर ट्रॉलियों को लगा उठान कार्य करवाया जा रहा है। जबकि उनके ट्रक खाली खड़े हैं। ट्रक मालिक भारी टैक्स अदा करते हैं और इसके बाद भी उनको काम नहीं मिल पाता और जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इस मामले को लेकर वह मार्केट कमेटी और अन्य अधिकारियों को भी शिकायत दे चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। वहीं उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
हो सकता है कभी भी बड़ा हादसा
ट्रैक्टर ट्रॉली में लोड की गई धान की बोरियों के कारण कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। जिससे अन्य वाहन चालकों का इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। जुगाड़ कर तैयार की गई ट्रॉलियों की चारों तरफ की स्पोर्ट कभी भी हट सकती है और पीछे खुला हुआ डाला भी किसी भी हादसे को अंजाम दे सकता है। जिसका नुकसान आमजन को झेलना पड़ेगा।
ट्रक यूनियन के पास ट्रकों की कमी होने के चलते ट्रॉलियों से उठान कार्य करवाया जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद टोकन काटने की प्रक्रिया बंद की गई थी। जबकि आई फार्म में इसका पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है।
-विकास सेतिया, सचिव, मार्केट कमेटी सिरसा।

बिना दस्तावेजों के ट्रैक्टर चालकों के चालान करते पुलिस कर्मी। - फोटो : Sirsa

फैक्टरी में लेकर पहुंचे ट्रैक्टर चालक को रोकते मंजीत सिंह के साथ बहस करते फैक्टरी संचालक। संवाद- फोटो : Sirsa

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