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पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं विचारों और नवाचार का केंद्र : प्रो. विजय

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सिरसा।  डॉ एसआर रंगनाथन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए कुलपति प्रो विजय कुमार। प्रवक्ता
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय में पुस्तकालय के पिता कहे जाने वाले डॉ. एसआर रंगनाथन की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. विजय कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं, बल्कि विचारों, सृजनशीलता और नवाचार का केंद्र हैं।
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कुलपति ने कहा कि यह ज्ञान के लोकतंत्रीकरण का सशक्त माध्यम है, जहां हर विद्यार्थी समान अवसर के साथ सीख सकता है। डिजिटल युग में पुस्तकालय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यह न केवल छपे हुए शब्द बल्कि वैश्विक स्तर के ई-संसाधन भी उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि विवेकानंद पुस्तकालय को देश के अग्रणी विश्वविद्यालय पुस्तकालयों की श्रेणी में लाना हमारा संकल्प है।

इस दिशा में सुविधाओं एवं संसाधनों का लगातार विस्तार किया जा रहा है। राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कुमार की ओर से पौधरोपण भी किया गया। विवेकानंद पुस्तकालय की पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. मोनिका वर्मा की ओर से रंगनाथन के चित्र पर पुष्प अर्पित किए व दीप प्रज्वलित कर नमन किया।
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पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. मोनिका ने कहा कि विद्यार्थी के जीवन में पुस्तकालय की एक अहम भूमिका होती है। विद्यार्थी के ज्ञान कोष में वृद्धि करने का केवल मात्र एक जरिया है, उसे पुस्तकालय कहा जाता है। उन्होंने बताया कि विवेकानंद पुस्तकालय हरियाणा की सबसे हाईटेक पुस्तकालय में से एक है। इसमें निरंतर ई- संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों के पढ़ाई का जरिया आसान बनाया जा रहा है। इस मौके पर कर्मचारियों व विद्यार्थियों ने लड्डू बांटकर रंगनाथन को याद किया। इस मौके पर पुस्तकालय स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
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