फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहादत को नेता व अधिकारी भूल सकते हैं पर हम नहींः रेशमा

विज्ञापन
शहीद निहाल सिंह गोदारा की प्रतिमा। - फोटो : Sirsa
विज्ञापन
चोपटा। आम तौर पर सरकार घोषणा करके भूल जाती है, लेकिन देश की रक्षा के लिए जान देने वाले जांबाज जवानों की शहादत को भूलना उनकी शहादत का घोर अपमान है। शहीद निहाल सिंह गोदारा की शहादत का दिन सरकार, प्रशासन व नेताओं द्वारा तो भूला दिया लेकिन शहीद की पत्नी रेशमा देवी कभी नहीं भूलती।
विज्ञापन

सीमा सुरक्षा बल की 21वीं बटालियन का जवान निहाल सिंह गोदारा निवासी खेड़ी 11 नवंबर 1999 को कश्मीर में देश की सीमा की रक्षा करते हुए आतंकवादियों की गोली का शिकार हो गया था। लेकिन प्राण छोड़ने से पहले निहाल सिंह ने आतंकवादियों को धराशायी कर दिया था। शहीद का शव दो दिन बाद गांव खेड़ी पहुंचा था, जहां 13 नवंबर 1999 को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद निहाल सिंह गोदारा के शहीदी दिवस पर उसकी प्रतिमा पर वीरांगना रेशमा देवी ही माल्यार्पण करती है और कोई नहीं पहुंचता। वीरांगना रेशमा देवी ने बताया कि उस समय सरकार ने कई घोषणाएं की थी कि खेड़ी के राजकीय स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर किया जाएगा। खेड़ी से कागदाना जाने वाली सड़क का नाम भी शहीद के नाम पर रखा जाएगा। लेकिन एक भी घोषणा पर अमल नहीं हुआ। रेशमा देवी ने बताया की उस वक्त घोषणा के अनुसार 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तो मिली थी। पुत्र मुकेश को सरकारी नौकरी मिल गई, लेकिन गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप नहीं मिला। न ही स्कूल व सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखा गया है। उन्होंने तो अपने खर्चे से ही गांव में स्मारक बनाया व उसमें प्रतिमा स्थापित की है। हर बार सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई नहीं आता। नेता व अधिकारी तो भूल सकते हैं पर हम कैसे भूल सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें