संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। रोडवेज डिपो से बीएस-6 मानक की बसों को दूसरे डिपो में भेजी जा रही है, जबकि वहां से बीएस-3 मानक की बस ली जा रही हैं। रोडवेज डिपो की ओर से अब तक पांच बीएस-6 मानक की बसों को दूसरे जिले के डिपो में भेजी गई है। इस पर रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने रोष जताई है। इनका कहना है सिरसा डिपो में खटारा हो चुकी बसों को भेजा जा रहा है। इससे लंबे रूट पर सेवाएं प्रभावित होंगी।
सिरसा डिपो के प्रधान रिछपाल संधू ने बताया कि राजधानी चंडीगढ़, दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में जाने के लिए बीएस-6 मानक की बस जरूरी है। सिरसा डिपो से ये बसे दूसरे जिलों में भेजी जा रही है, जबकि वहां से बीएस-3 बसें मंगवाई जा रही है। इसी तरह से चलता रहा तो सिरसा डिपो की कोई भी बस लंबे रूट पर नहीं जा सकेगी। इसका खामियाजा सिरसा के लोगों को भुगतना पड़ेगा।
संधु ने कहा कि सिरसा एक सीमावर्ती जिला है। जहां से पंजाब, राजस्थान की सीमा लगती है। पंजाब और राजस्थान के हजारों यात्री सिरसा डिपो से सफर करते हैं। संधू ने बताया कि जिस तरह से सरकार बसों को एक डिपो से दूसरे डिपो में ट्रांसफर कर रही है, वह विभाग हित में नहीं है। सरकार को चाहिए की बीएस-6 की बसें हर डिपो में उपलब्ध करवाए, ताकि लंबे रूट पर चलने वाली बसें सुचारु रूप से चलती रहे।
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परिवहन मंत्री कर रहे बस स्टैंडों का निरीक्षण, सरकार राजनीतिक कार्यक्रमों में भेज रही
आत्माराम बैनीवाल, शेर सिंह खोड व सुरेंद्र सिंह बैरागी ने बताया कि एक तरफ तो परिवहन मंत्री रोडवेज के अड्डों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार के राजनीतिक कार्यों में बसों की ड्यूटी लगा रही है। 24 नवंबर को वाल्मीकि जयंती पर सिरसा डिपो से 50 बसों की ड्यूटी लगाई गई। इससे रूट प्रभावित रहे। मंगलवार को भी पंचकूला के लिए सरकारी बसों की ड्यूटी लगी है।