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Sirsa News: सालों की खटास मिटाने के लिए कांडा-तंवर ने की जुगलबंदी

Sun, 14 Apr 2024 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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गले मिलते अशोक तंवर और विधायक गोपाल कांडा
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सिरसा। एक दौर था जब 2009 में कांग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी बनकर आए डॉ. अशोक तंवर ने सिरसा में कदम रखा था और उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता। वहीं दूसरी ओर हलोपा के मुखिया गोपाल कांडा भी सिरसा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। तत्कालीन हुड्डा सरकार को समर्थन देने के बाद कांडा को गृह राज्यमंत्री का दर्जा मिला था। तब से लेकर आज तक कांडा व तंवर के बीच रिश्तों की खटास आरंभ हो गई और यह बढ़ती चली गई।
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अब जब 2024 में भाजपा ने डॉ. अशोक तंवर को सिरसा लोकसभा का प्रत्याशी बनाया गया है, तो दूसरी ओर हलोपा भाजपा गठबंधन का घटक दल है। ऐसे में सालों पुरानी इस खटास को रविवार को मिठास में बदलने के लिए विधायक गोपाल कांडा ने कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया। इसमें लोकसभा प्रत्याशी डॉ. अशोक तंवर भी शामिल हुए। एक तरह से दोनों नेताओं ने अपने पुराने राजनीतिक कड़वे मीठे अनुभवों को दरकिनार कर एक होने की बात कहीं है। संवाद

2009 में इनेलो प्रत्याशी को हराया था तंवर ने
वर्ष 2009 की बात है, जब कांग्रेस को सिरसा लोकसभा क्षेत्र से जीत के लिए कोई सशक्त उम्मीदवार चाहिए था। इस सीट पर इनेलो का प्रभाव अधिक था। ऐसे में कांग्रेस संगठन ने दिल्ली में बैठे डॉ. अशोक तंवर को पैराशूट प्रत्याशी बना सिरसा सीट से उतार दिया। राहुल गांधी के साथी होने के चलते सभी ने उनको अपना लिया। उस समय डॉ. अशोक तंवर ने इनेलो प्रत्याशी डॉ. सीताराम को 35,001 मतों से हरा कर जीत हासिल की थी। वहीं दूसरी ओर इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में गोपाल कांडा ने निर्दलीय होते हुए सिरसा विधानसभा सीट से भारी मतों से जीत हासिल की थी। उस समय कांग्रेस को हरियाणा विधानसभा में मात्र 40 सीटें मिली थी। कांग्रेस ने जहां हजकां में सेंधमारी करते हुए 5 विधायकों को अपने पाले में ला दिया तो साथ ही उस समय जीते 7 निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस के पाले में लाने का काम गोपाल कांडा ने किया था। यही कारण था कि उनको तत्कालीन हुड्डा सरकार ने गृह राज्यमंत्री का ओहदा दिया।
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कैसे बढ़ी कांडा-तंवर में दूरियां
अब सिरसा लोकसभा सीट से जहां भाजपा के प्रत्याशी डॉ. अशोक तंवर हैं, तो दूसरी ओर सिरसा विधानसभा सीट से गोपाल कांडा विधायक हैं। दोनों के बीच खटास उस समय सामने आई जब 2010 में सिरसा में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आना था। इस कार्यक्रम में जो बैनर लगे थे, उसमें कहीं भी डॉ. अशोक तंवर का नाम नहीं था। यहां पर एक धर्मशाला का उद्घाटन किया जाना था। उस शिलापट्ट पर तंवर का नाम न होने से वे नाराज हो गए और वापिस चले गए। बाद में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र हुड्डा स्वयं उनको मनाकर अपने साथ लेकर आए और साथ ही बैनर भी बदलवाए गए। कांडा व तंवर के बीच रिश्तों कि यह खटास उस समय उस और अधिक बढ़ गई, जब रतिया विधानसभा क्षेत्र में 2011 में उपचुनाव हुए थे। दरअसल रतिया से इनेलो के विधायक ज्ञानचंद ओड के निधन के बाद यहां से कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार जरनैल सिंह को खड़ा किया था। इस उपचुनाव का पूरा जिम्मा गोपाल कांडा व सांसद डॉ. अशोक तंवर के पास था। वहां पर भी जब तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक रैली को संबोधित करने आए तो उनको आगे आदमपुर जाना था। बताते हैं कि हैलीपेड पर ही डॉ. तंवर व गोपाल कांडा में जमकर तू तड़ाक हुई थी। इसके बाद दोनों के रिश्तों में जो कड़वाहट हुई, वह हमेशा सुर्खियों में रही है।

अब खटास को मिठास में बदलने के लिए हुए एकजुट
वर्ष 2011 में बनी दूरियां पूरे 23 साल बाद रविवार को विधायक गोपाल कांडा ने हिसारिया रोड पर स्थित हलोपा कार्यालय में कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन कर दूर की। कांडा व तंवर ने इस दौरान कहा कि वह एक हैं और मिलकर इस चुनाव को लड़ेंगे। दोनों ही पिछली कड़वाहटों को भूल चुके हैं।


हमारे खट्टे मीठे रिश्ते रहे हैं, लेकिन हर परिवार में ऐसा होता है और यह होना भी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होगा तो रिश्तों का पता नहीं चलेगा। परिवार को जोड़ने के लिए खट्ठा और मीठा अनुभव जरूरी है। अब सब ठीक है और मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा।
गोपाल कांडा, विधायक हलोपा, सिरसा

हमारा मिलाप तो हमेशा होता ही रहा है। अक्सर सामाजिक कार्यों में हम मिलते रहे हैं, गोवा तक हमारी मुलाकात रही है। बस सार्वजनिक तौर पर हम दिखाई नहीं दिए। कुछ परिस्थितियां थी, जिस कारण ऐसा हो पाया। अब आगे मिलकर भाजपा-हलोपा गठबंधन के साथ मिलकर काम करेंगे।
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-डॉ. अशोक तंवर, भाजपा प्रत्याशी, सिरसा लोकसभा सीट।
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