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Sirsa News: दादा और भाई की मौत से जोगेंद्र ने नहीं हारा हौसला, यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर पूरा किया सपना

Tue, 22 Apr 2025 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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माता-पिता के साथ जोगिंद्र सिहाग।  स्रोत : स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। जिले के गांव बनवाला के रहने वाले जोगेंद्र सिहाग ने यूपीएससी की परीक्षा में 521वीं रैंक हासिल की है। जोगेंद्र का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा पास कर उन्होंने अपने दादा और छोटे भाई का सपना पूरा किया है। छोटे भाई मुकेश की गत वर्ष यूपीएससी पेपरों के समय और दादा जगदीश सिहाग की प्रारंभिक परीक्षा के दौरान मौत हो गई थी, इस कारण पिछली बार जोगेंद्र परीक्षा पास करने में सफल नहीं हो सके लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लक्ष्य हासिल कर उनका सपना पूरा किया। जोगेंद्र सिहाग के पिता सुरेंद्र चौधरी खेतीबाड़ी करते हैं और माता मैना देवी गृहणी हैं।





राजस्थान से की बीए की पढ़ाई

जोगेंद्र ने अपनी शिक्षा राजस्थान और सिरसा में पूरी की है। सिरसा में उसने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई की। उसके बाद वह बीए के लिए राजस्थान चला गया। राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीए की। वहीं से उसने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी और उसका सफर शुरू हो गया।
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जोगेंद्र सिहाग का प्रोफाइल

रैंक - 521वां

जन्मतिथि - 12 पुरवरी 2001

मूलरूप पता - गांव बनवाला, सिरसा

10वीं - 2016-17 सत्र

12वीं - 2018-19 सत्र

बीए - 2021-22 सत्र



आईएएस हेमंत बोले-राजस्थान में हुई दोस्ती पहुंची यूपीएससी तक

आईएएस हेमंत पारिक ने बताया कि जोगेंद्र राजस्थान यूनिवर्सिटी में बीए की पढ़ाई करता था। वह जयपुर के एक कालेज में पढ़़ते थे। पढ़ाई के दौरान ही दोनों की मुलाकात हुई। दोनों ने साथ मिलकर आईएएस बनने की लक्ष्य तय किया। दोनों ने जयपुर में जाकर अपनी यूपीएससी की तैयारी शुरू की। जयपुर में पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों दिल्ली चले आए। हेमंत ने बताया कि पिछले साल ही उसका यूपीएसपी का पेपर क्लीयर हो गया था। उस दौरान जोगेंद्र अपने छोटे भाई की मौत के चलते सही तरह से तैयारी नहीं कर पाया था। अबकी बार यूपीएसपी परीक्षा पास कर ली है।
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पढ़ाई को अपना लक्ष्य बना लिया था

जोगेंद्र सिहाग ने बताया कि पढ़ाई को छोड़कर कुछ नहीं किया। हेमंत और वह दोनों शाम को एक साथ में बैठते थे और शाम 7.30 बजे से लेकर सुबह 10 बजे तक पढ़ते थे। बीच में कभी-कभी घंटा या आधा घंटा चाय पी लेते और घूम लेते। सुबह 10 बजे के बाद नाश्ता किया और बाद में सो जाते थे। शाम को पढाई का शेड्यूल शुरू हो जाता। सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करते और आनलाइन पढ़ाई करते थे।
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