प्रदेश सरकार द्वारा जाटों को बातचीत के निमंत्रण से सिरसा के जाट सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक झूठे मुकदमें खारिज नहीं होंगे हमारा धरना जारी रहेगा। 14वें दिन शनिवार को जाट न्याय धरने पर बैठे जाटों ने कहा कि हरियाणा के अन्य स्थानों से धरने उठ भी गए तो भी वे अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे, क्योंकि उनके धरने का प्रदेश के अन्य धरनों से कोई संबंध नहीं है। सिरसा के जाटों ने आज सरकार से हो रही वार्तालाप का पूर्णतया बहिष्कार करने की घोषणा की है। यहां से एक भी जाट वार्तालाप के लिए नहीं गया।
आज धरने पर बैठे सर्व जाट संघ के अध्यक्ष विकल पचार ने कहा कि गत वर्ष प्रदेश में हुए आंदोलन के बाद सरकार ने स्वयं माना था कि सिरसा सबसे शांतिप्रिय रहा इसके बावजूद सरकार ने जिले के 600 लोगों पर बनाए मुकदमें खारिज नहीं किए। उन्होंने कहा कि जब जिले में किसी प्रकार का उपद्रव हुआ ही नहीं तो 600 लोगों पर केस क्यों बनाए गए और जांच कर मुकदमें खारिज क्यों नहीं किए। इससे साफ जाहिर होता है प्रदेश सरकार की नीयत में खोट है। हरियाणा के जाट नेता भले से सरकार से बात कर विश्वास कर लें पर हम तब तक नहीं मानेंगे जब तक सिरसा के शांतिप्रिय लोगों पर बनाए गए झूठे केस खारिज नहीं किए जाएंगे। पचार ने कहा कि मुकदमें वापस नहीं लिए गए तो 26 फरवरी से गांवों में भी धरने शुरू कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये धरना 36 बिरादरी का धरना है क्योंकि आंदोलन के दौरान सभी समुदायों के लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हुए थे। सिरसा के जाटों ने आज सरकार से हो रही वार्तालाप का पूर्णतया बहिष्कार करने की घोषणा की है। सिरसा से एक भी जाट वार्तालाप के लिए नहीं गया। सेक्टर-19 स्थित जाटों के जारी धरने में विकल पचार, कृष्ण ढाका, रणधीर जोधकां, लादु राम जांघू, विकास तेतरवाल, डॉ. सुभाष सिंवर, रमेश, मदन, राजा भोभरिया, अशोक गोदारा, धर्मवीर गोदारा, ख्याली राम हंजीरा, पृथ्वी सिद्धू आदि मौजूद रहे।