मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन ने लंबित मांगों को लेकर शनिवार को बरनाला रोड स्थित देवीलाल पार्क में एकत्रित होकर थाली बजाकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। अब सोमवार को सांसद को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि आगामी 28 फरवरी को पंचकूला में आयोजित होने वाले आक्रोश प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर भाग लेंगी। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी भी की।
अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में यूनियन की जिला सचिव राजरानी, कांता रानी, शकुंतला रानी, सुखविंद्र कौर, गुरचरण कौर, सुनीता रानी, ममता, पूजा, सुनीता, सीता, कमलेश, बिमला, राजबाला, सीमा, समेस्ता, रजनी, सोनू सहित अन्य ने बताया कि वे मांगों को लेकर पिछले काफी सालों से संघर्ष करती आ रही हैं, लेकिन अभी तक किसी भी सरकार ने उनकी मांगों की ओर गौर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पूर्व कर्मचारियों से अनेक लोक लुभावने वादे किए थे, लेकिन अभी तक इन वायदों पर कोई गौर नहीं किया गया है।
सरकार कर्मचारियों को प्रताड़ित करने पर तुली है और रोजाना नए-नए फरमान जारी कर रही है, जिससे कर्मचारी वर्ग में रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में आशा व मिड-डे-मील वर्कर्स द्वारा 28 फरवरी को हरियाणा विधानसभा पर आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा। आक्रोश प्रदर्शन के लिए अन्य कर्मचारी संगठनों से भी सहयोग की अपील की जा रही है। अब सोमवार को सांसद चरणजीत सिंह को ज्ञापन सौंपेंगी, ताकि उनकी आवाल संसद में उठाई जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार मात्र 2500 रुपये प्रति देकर उनका आर्थिक शोषण कर रही है। इसमें से भी साल में दो माह का वेतन काट लिया जाता है।
ये हैं मांगें
आंगनबाड़ी, आशा, मिड-डे-मील कर्मियों सहित तमाम परियोजनाकर्मियों को सरकारी कर्मचारी बनाया जाए और तब तक उन्हें 18 हजार रुपये वेतन दिया जाए, आगामी केंद्रीय बजट में केंद्र सरकार परियोजनाओं के बजट में पर्याप्त बढ़ोत्तरी करे, वर्कर्स के मानदेय और वेतन में बढ़ोतरी करे और पूर्व की घोषणाओं को लागू करे, 45वें श्रम सम्मेलन के अनुसार सभी वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ, जैसे पेंशन, मैटरनिटी अवकाश, पीएफ, सुरक्षा भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, ड्रेस आदि तमाम सुविधाएं दी जाएं, मिड-डे-मील और आईसीडीएस योजना के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, छंटनी ग्रस्त मिड-डे-मील व आशा वर्कर्स की बहाली हो।