- जिस दुकान नंबर 117 पर कृषि विभाग को करनी है कार्रवाई, उसी दुकान का नंबर प्रयोग कर रहा पुराना मालिक
- तीन साल पहले बंद हुए दुकान के बिल
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। आपदा में अवसर ढूंढने में अधिकारी व कर्मचारी कसर नहीं छोड़ते हैं। जहां अब तक शहर में फर्जी फर्म पर यूरिया सेल-परचेज का मामला ठंडा नहीं पड़ा है। वहीं, एक नया मामला सिंचाई विभाग की मेंटेनेंस विंग का सामने आया है। तीन साल पहले बंद कर दी गई दुकान के नंबर का बिल लगाकर बाढ़ के समय में करवाए गए काम का बिल पास किए गए हैं।
हैरानी की बात है कि एसडीओ स्तर के अधिकारियों का इस मामले की जानकारी तक नहीं है। निचले स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों ने यह सारा खेल किया हुआ है। नये आए एसडीओ रोहित कुमार को यह मामला पता चला तो वह हैरान रह गए। उन्होंने जांच शुरू कर दी है।
अहम बात यह है कि बिल में सैनी इलेक्टि्रकल के नाम से बिल दुकान नंबर 117 के जारी किए गए हैं लेकिन इस दुकान से सैनी इलेक्टि्रकल तीन साल से शिफ्ट हो चुकी है। वह एडिशनल मंडी की 5 और छह नंबर में चल रही है लेकिन दो सालों से लगातार इसी दुकान की पुरानी बुक का प्रयोग कर बिल काटे जा रहे हैं। वहीं, साथ ही नई दुकान नंबर के बिल भी काटकर विभाग में लगाए जाए रहे हैं।
मंडी की दुकान 117 पर जारी हो चुके हैं नये जीएसटी नंबर
तीन साल से सैनी इलेक्टि्रकल के दुकान छोड़ने के बाद दुकान नंबर 117 को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। दुकान 117 ए और बी। दोनों में अलग-अलग फर्म काम कर रही हैं। उन्होंने अपने जीएसटी नंबर लिए हुए हैं। भंबूर मामले में यूरिया फर्जी बिल मामले में 117 नंबर दुकान का ही नाम सामने आया है। तभी से यह दुकान बंद पड़ी है। विभाग की टीमें इस पर नजर जमाए हुए हैं। ऐसे में कैसे कोई पुरानी बुक के आधार पर सरकारी विभाग में इन दुकान का नाम प्रयोग कर बिल जमा करवा सकता है।
दो साल से बिल बुक का हो रहा है प्रयोग, ऑडिट में कैसे बचे
सिंचाई विभाग की मेंटेनेंस विंग में संबंधी एजेंसी की ओर से दो साल से दुकान नंबर 117 के बिल लगाए जा रहे हैं। इसकी ऑडिट में किसी को शक भी नहीं हुआ कि बिल सही है या नहीं। वर्ष 2025 में दुकान 5 और 6 एडिशनल मंडी के बिल लगाए गए तब भी किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। दोनों के जीएसटी नंबर एक जैसे थे।
कोट्स
जनवरी में ही सिरसा ट्रांसफर हुआ है। ये बिल मेरे आने से पहले के बताए गए हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच कर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-रोहित कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग मरम्मत विंग