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स्वास्थ्य विभाग ने 71 अस्थायी कर्मचारियों को भेजा घर, कोरोना वैक्सीन, सैंपलिंग और जांच रिपोर्ट संबंधित काम प्रभावित

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नागरिक अस्पताल में कर्मचारियों की रिलीव होने के बाद खाली पड़ी कुर्सियां। यहां पर होती थी कोरोना ? - फोटो : Sirsa
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सिरसा। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग में अस्थायी तौर पर भर्ती किए गए 71 कर्मचारियों का अनुबंध वीरवार को खत्म हो गया। ऐसे में विभाग ने उन्हें अब घर भेज दिया। इस कारण शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में चलने वाला कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन, कोरोना सैंपलिंग और आरटीपीसीआर लैब में जांच रिपोर्ट तैयार करने का काम ठप हो गया। ऐसे में नागरिक अस्पताल में आए 1500 से ज्यादा मरीज और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी वैकल्पिक प्रबंध भी नहीं कर पाए।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीरवार देर रात को कोरोना के कारण अस्थायी तौर पर भर्ती किए गए कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया। जिसके बाद उक्त कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई। वहीं शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में पहुंचे सभी कर्मचारियों ने रोष भी व्यक्त किया और स्वास्थ्य विभाग से दोबारा से अनुबंध बढ़ाए जाने की मांग की है। हालांकि अधिकारियों ने उन्हें मुख्यालय के आदेश आने के बाद ही दोबारा से काम पर बुलाए जाने की जानकारी दी है। लेकिन इसके बाद भी शुक्रवार को कई कर्मचारियों को अधिकारियों की ओर से काम पर लगाए रखा। कर्मचारियों ने इस संबंध में अधिकारियों को भी मांग पत्र सौंपा है। वहीं पीएमओ डॉ. मनजीत सिंह सिविल सर्जन को पत्र लिखकर कर्मचारी दिए जाने की मांग भी उठाई है। ताकि मरीजों को दी जानी वाली सुविधाएं निरंतर जारी रखी जा सके।
विभाग ने स्टाफ नर्स, लैैब टेक्नीशियन और डाटा ऑपरेटर किए थे तैनात
कोरोना के मामले बढ़ने के कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब दो वर्ष पहले कर्मचारियों की अस्थायी तोर पर नियुक्ति की गई थी। इनमें 28 लैब टेक्नीशियन, 28 स्टाफ नर्स व रिसर्च असिस्टेंट, 4 फार्मासिस्ट व 11 डाटा ऑपरेटर नियुक्त किए थे। लेकिन अब इन सभी कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है। जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे कोरोना वैक्सीनेशन और अन्य अभियान का काम ठप हो गया।
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आरटीपीसीआर लैैब में सबसे अधिक कर्मचारियों की थी ड्यूटी
नागरिक अस्पताल में विभाग की ओर से बनाई गई आरटीपीसीआर लैब में सबसे अधिक कर्मचारियों की ड्यूूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन सभी कर्मचारियों की कोरोना सैंपल लेने, वैक्सीनेशन अभियान चलाने और सैंपलों की जांच के बाद लैब में उनकी रिपोर्ट तैयार करने में लगाई है। शुक्रवार को कर्मचारियों को रिलीव किए जाने के बाद कोरोना सैंपल देने, वैक्सीन लगवाने और जांच रिपोर्ट लेने के लिए पहुंचे लोगों को इस परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि कई कर्मचारी इस दौरान सेवाएं देते हुए भी दिखाई दिए।
रिलीव के बाद भी कर्मचारियों की लगाई हाजिरी तो विभाग होगा जिम्मेदार
स्वास्थ्य विभाग के पास पहले ही कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे में कोरोना के दौरान लिए गए स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को रिलीव किए जाने के कारण स्वास्थ्य विभाग की परेशानी पहले से अधिक बढ़ाई है। वहीं मुख्यालय की ओर से जारी किए गए पत्र में रिलीव किए गए स्वास्थ्य कर्मचारियों से सेवाएं ली जाती है और उनकी हाजिरी लगवाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी विभाग अधिकारियों की होने की बात कही है।
कौशल रोजगार योजना के तहत की जा रही कर्मचारियों की भर्ती
सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है और कौशल रोजगार निगम के तहत नए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। जिसके कारण निगम की ओर से कई कर्मचारियों के पुराने पदों को खत्म किया जा रहा है। इस संबंध में पीड़ित कर्मचारी भी संबंधित विभाग के कर्मचारियों को शिकायत देने के लिए पहुंच रहे हैं।
कोरोना के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थायी तौर पर लिए गए 71 कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है। जिसके बाद लैब, वैक्सीनेशन और सैंपलिंग प्रक्रिया के लिए फील्ड के स्टाफ को बुलाया गया है। मुख्यालय की ओर से अगर अनुबंध बढ़ाया जाता तो ही वह उन्हें रख सकते हैं।
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-डॉ. बुधराम, उप सिविल सर्जन, सिरसा

नागरिक अस्पताल से रिलीव किए गए कर्मचारी पार्क में मीटिंग करते हुए।- फोटो : Sirsa

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