संत बहादुर चंद उर्फ वकील साहिब का फाइल फोटो।
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हरियाणा के सिरसा में डेरा जगमालवाली के संत बहादुर चंद यानी वकील साहिब का जन्म गांव चौटाला के मनी राम बिश्नोई (सिहाग) व माता मनोहरी देवी के घर पर 10 दिसंबर 1944 को हुआ था। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हिसार के दयानंद महाविद्यालय में आगे की शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षण के समय वे दयानंद कॉलेज के लाजपत राय छात्रावास में रहे और आर्य समाज प्रचारणी सभा के अध्यक्ष बने। कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ में लॉ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसी दौरान वह गांव चौटाला में शाह मस्ताना बलूचिस्तान के अनुयायी महात्मा गुरदास के भाई सरदार बच्चन सिंह के संपर्क में आए।
इसके बाद वे धीरे धीरे डेरे से जुड़ते गए। वर्ष 1968 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मंडी डबवाली में प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। इस समय में उनकी मुलाकात पूर्व डेरा प्रमुख संत मैनेजर साहिब से हुई। धीरे-धीरे वकील साहिब उनके करीब आते गए और वर्ष 1991 में पूर्व डेरा प्रमुख मैनेजर साहिब के आदेश पर उन्होंने मंडी डबवाली में पहली बार सत्संग किया।
जब संत मैनेजर साहिब ने वर्ष 1998 में अपना चोला छोड़ा तो वकील साहिब को डेरा जगमालवाली की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी। ऐसे में 9 अगस्त 1998 को वकील साहिब डेरा प्रमुख बने।
देश और विदेश में प्रसिद्ध है डेरा जगमालवाली
डबवाली से 10 किलोमीटर और कालांवाली से 8 किलोमीटर दूर डेरा जगमालवाली पड़ता है। डबवाली के अंतर्गत आने वाले गांव जगमालवाली को देश और विदेश में जाना जाता है। जिसका मुख्य कारण 300 साल से डेरा जगमालवाली यानी मस्ताना शाह बलूचिस्तानी आश्रम का यहां पर होना है। डेरे के होने के चलते गांव सामाजिक, धार्मिक व खेल गतिविधियों के लिए चर्चाओं में रहता है।
अपने गांव में बने डेरे में आना जाना रहता था
गांव चौटाला में डेरा प्रमुख बहादुर चंद का आना जाना लगा रहता था। गांव में एक छोटा डेरा बनाया गया था। जहां पर वह आते थे और ग्रामीण व अनुयायियों से मिलते थे। वह शादीशुदा थे और बेटा होने के बाद उन्होंने परिवार को छोड़ दिया था। वे डेरे में सेवा करने लगे थे। गांव में आज भी उनका परिवार रहता है। ग्रामीणों के बीच उनका बड़ा मान सम्मान है।