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रोडवेज कर्मी बिफरे, चक्का जाम जारी

Mon, 29 May 2017 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिरसा
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Haryana Roadways - फोटो : demo pic
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निजी बस के सिरसा से डबवाली रूट पर चलने से भड़के हरियाणा रोडवेज सिरसा डिपो के कर्मचारियों ने रविवार को फिर अपनी बसों का चक्का जाम कर दिया। सिरसा डिपो की लगभग 200 बसें रविवार को सड़क पर नहीं उतरी, जिसकी वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बसों का चक्का जाम होने से विभाग को हर रोज 15 लाख का फटका लग रहा है। निजी बस चलने पर कर्मचारी उग्र हो गए थे पर पुलिस बल ने स्थिति का संभाल लिया। हरियाणा रोडवेज की तालमेल कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि राज्य सरकार के परिवहन नीति यूं ही ढुलमुल रही तो 18 जून को रोडवेज कर्मचारी मतलोडा में परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार का घेराव करेगी और 9 जुलाई को मुख्यमंत्री का करनाल में घेराव करेंगे।
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रविवार सुबह दिल्ली और चंडीगढ़ जाने वाली बसें ही सिरसा डिपो से अपने गंतव्य को गई थी मगर सुबह करीब पौने आठ बजे एक निजी बस सिरसा से डबवाली की ओर रवाना हो गई जिसका पता चलते ही हरियाणा रोडवेज सिरसा डिपो की कर्मचारी यूनियन ने विरोध स्वरूप अपने डिपो की सभी बसों का चक्का जाम कर दिया। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी जिले में जिन 6 निजी बसों के चलने का विरोध कर रहे हैं, सिरसा से डबवाली जाने वाली वह निजी बस सेवा थी, उन्हीं में से एक थी। निजी बस सेवा के संचालित होने की सूचना ज्यों ही हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों को मिली, त्यों ही उन्होंने अपने डिपो की सभी बसों को बस अड्डा परिसर में ही लगा दिया और बस अड्डे के बाहर ही तंबू लगाकर हरियाणा सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया। सिरसा डिपो की बसों की हड़ताल होने से दिल्ली, चंडीगढ़, हिसार, रोहतक, बहादुरगढ़, बठिंडा, गंगानगर, हनुमानगढ़ सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को जाने वाले यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि सिरसा डिपो को छोड़कर फतेहाबाद, कैथल, भिवानी, रोहतक जिले के डिपोें की बसों ने निरंतर यात्रियों को सेवाएं दी। इसके साथ-साथ राजस्थान रोडवेज और पंजाब रोडवेज भी बस अड्डे के बाहर से ही यात्रियों को सेवाएं दे रही थी मगर सिरसा डिपो की बसें बंद होने से बड़े रूटों के साथ-साथ लोकल रूटों पर भी जाने वाले यात्रियों को गर्मी के मौसम में काफी परेशानी हुई।

कर्मचारी नेता सुरजीत अरोड़ा, चिमनलाल, शेर सिंह, शिवराज सिंह, मदनलाल, लक्ष्मणदास, रामानंद, सुरजीत चालक आदि ने धरना देते हुए कहा कि राज्य के परिवहन मंत्री एक ओर रोडवेज की सभी यूनियनों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन कुछ ओर देते हैं वहीं जब न्यायालय में वर्ष 2016-17 की ट्रांसपोर्ट नीति की बात आती है तो वहां कुछ ओर बयान जारी करते हैं। ऐसे में रोडवेज कर्मचारियों से छलावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से नीति स्पष्ट नहीं होती, तब तक निजी बसों को न तो बस अड्डा परिसर के भीतर से और न ही बाहर से चलने दिया जाएगा।
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नहीं खोजा जा सका समाधान
शासन-प्रशासन की विफलता की वजह से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोडवेज कर्मचारी संगठनों से कई दौर के बातचीत के बाद निर्णय नहीं हो पाना, सरकार की विफलता साबित करता है। मामले में यदि रोडवेज कर्मचारी गलत है तो सरकार उनके खिलाफ ठोस कदम क्यों नहीं उठाती? यदि रोडवेज कर्मचारियों की मांग जायज है तो उसे स्वीकार क्यों नहीं करती? आखिर दोनों के बीच यात्रियों को क्यों पिसा जा रहा है।
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