संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पिता की उम्मीदों के विपरीत जाकर रानियां के 18 वर्षीय गुरविंदर सिंह ने अपनी राह खुद चुनी। वह कराटे में देश के लिए पदक जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। अब तक वह राष्ट्रीय व राज्यस्तर पर एक स्वर्ण व दो कांस्य पदक जीत चुका है। हाल ही में उसका चयन साउथ एशिया कराटे चैंपियनशिप के लिए हुआ है।
गुरविंदर सिंह के पिता सुरेश कुमार पेशे से चिकित्सक हैं। वे चाहते थे कि उनका बेटा भी मेडिकल लाइन में जाकर एक डॉक्टर बने, लेकिन गुरविंंदर ने अपने लिए कुछ अलग ही राह चुनी। गुरविंदर ने बताया कि उसका खेलों में ज्यादा रुझान है। एक दिन वह स्कूल की तरफ से कराटे की एकेडमी में दौरे के लिए गया था। वहीं बच्चों को खेलने हुए देखा तो कराटे की तरफ रुझान बढ़ गया। उसने 2018 से उसने खेलना शुरू किया था। उसने फतेहाबाद से कराटे कोच संदीप कुमार से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। गुरविंदर का कहा कि उसका सपना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कराटे में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे।
एक महीने के बाद भी मेडिकल छोड़कर कलां संकाय में लिया दाखिला
गुरविंंदर फिलहाल ग्यारहवीं कक्षा का कला संकाय का छात्र है। इससे पहले 10वीं पास करने के बाद उसने मेडिकल संकाय में दाखिला लिया था। गुरविंंदर ने मेडिकल संकाय में एक महीने तक पढ़ाई की, लेकिन उसकी रुचि नहीं बनी। मात्र एक महीने में ही गुरविंदर ने मेडिकल छोड़कर कला संकाय में दाखिला ले लिया। गुरविंदर ने बताया कि उनके पिता को उसका खेलना बिलकुल भी पसंद नहीं है। वह अभी भी उसे खेलने से मना करते हैं। वह खेल में अपना कॅरिअर बनाना चाहता है। गुरविंदर ने बताया वह दिन में 4 से 5 घंटे कराटे का अभ्यास करते हैं।
गुरविंंदर की उपलब्धियां
- जिलास्तरीय कराटे खेल प्रतियोगिता 2018 : कांस्य
- जिलास्तरीय कराटे 2023 : रजत
- राज्य स्तरीय कराटे चैंपियनशिप समालखा 2024 : कांस्य
- राष्ट्रीय स्तरीय कराटे चैंपियनशिप कुरुक्षेत्र जनवरी 2025 : स्वर्ण और कांस्य
- वर्ल्ड स्कूल गेम श्रीलंका आईएसएफ के लिए चयनित
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वर्जन
गुरविंदर सिंह खेलने में बहुत अच्छा है। हाल ही में उसका चयन साउथ एशिया कराटे चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इसकी तैयारी गुरविंदर कर रहा है। गुरविंदर सुबह व शाम दोनों टाइम अभ्यास के लिए खेल ग्राउंड में आता है। -सीमा रानी, कराटे कोच ।