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गांव जोड़कियां के किसान प्रेमसुख और महावीर सब्जियां बेचकर 3000 की प्रतिदिन कर रहे कमाई

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अपने खेत में सब्जी लगाता किसान - फोटो : Sirsa
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चोपटा (सिरसा)। राजस्थान की सीमा से सटे प्रदेश के पैंतालिसा क्षेत्र के गांव जोड़कियां में अधिकतर जमीन बरानी है। ज्यादातर खेती बारिश पर निर्भर होती है। समय पर बारिश होने से फसलों का उत्पादन अच्छा हो जाता है और बारिश न होने पर जमीन खाली रह जाती है। वर्तमान समय में किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तरीके से फल, सब्जियां आदि लगाकर कमाई करने में लगे हुए हैं।
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इसी कड़ी में गांव जोड़कियां के दो किसान भाई प्रेमसुख और महावीर सिंवर ने अपनी एक एकड़ बरानी जमीन में तरबूज, तौरी, टिंडे, बंगा, तर सहित कई प्रकार की सब्जियां लगाकर कमाई का जरिया खोजा। इस समय प्रतिदिन करीब 3000 रुपये की सब्जी बेचते हैं। खास बात यह है कि इन सब्जियों में रसायनिक खाद्य व दवाइयों का इस्तेमाल नहीं किया है। अनउपजाऊ जमीन को उपजाऊ करने के कारण दोनों किसान भाइयों ने प्रदेश के साथ-साथ निकटवर्ती राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान बनाई है।
गांव के ही किसान ओमप्रकाश से प्रेरणा लेकर शुरू की सब्जियां लगानी
किसान प्रेमसुख ने बताया कि रेतीली जमीन व नहरी पानी की कमी के कारण परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर ही बचत होती है, वरना घाटा ही लगता है। इसके चलते उसने खेती के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई करने का जरिया खोजना शुरू किया और अपने भाई महावीर सिंवर से चर्चा की। ऐसे में दोनों भाइयों ने गांव के किसान ओम प्रकाश जिसने कई वर्षों से ऑर्गेनिक तरबूज की खेती शुरू कर रखी है। उनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने 1 एकड़ रेतीली जमीन में सब्जियां लगाने का फैसला किया। जमीन में रेत ज्यादा होने के कारण पहले करीब 2 फुट रेत को हटाकर सब्जियों के लिए आवश्यक मिट्टी की खोज की। फिर उन्होंने फतेहाबाद से सब्जियों के बीज लाकर घर पर पौध तैयार की और 1 एकड़ जमीन में तोरी, टिंडे, त्तर, बंगा और तरबूज लगाए। उन्होंने बताया कि सरकार की सहायता से खेत में पानी की डिग्गी बना रखी है। इसमें पानी एकत्रित कर लिया जाता है और ड्रिप सिस्टम के द्वारा पौधों को पानी दिया जाता है।
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आसपास गांव के लोग ले जाते हैं सब्जियां और करते हैं तारीफ
किसान ने बताया कि वर्तमान में करीब 3000 रुपये की प्रतिदिन सब्जियां बेचते हैं। जिससे उन्हें एक एकड़ में प्रति महीने के हिसाब से 90 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है। इसके अलावा आगे मौसमी सब्जियां लगाने के लिए और जमीन तैयार कर रहे है। आधुनिक तरीके और बिना रासायनिक खाद के इस्तेमाल किए उगाई गई सब्जियां स्वादिष्ट व स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होती है। जिससे आसपास के गांव बराबरी, कुतियाना, जमाल, रुपावास इत्यादि के लोग सब्जियां लेने के लिए आते हैं और तारीफ करते हैं। उनकी लगाई सब्जियां देख कई किसान भी सब्जी लगाने के लिए जमीन को तैयार करने लगे हैं।
समय पर मिले सरकारी सहायता तो बढ़ सकता है व्यवसाय
प्रेमसुख और महावीर ने बताया कि सरकार द्वारा खेत में डिग्गी और सब्सिडी पर ड्रिप सिस्टम लगाया हुआ है। इसके अलावा अगर और सरकारी सहायता मिल जाए तो सब्जी के व्यवसाय को और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। इससे अन्य लोगों को भी रोजगार दिया जा सकता है। इसके अलावा नाथूसरी चौपटा के आसपास फ्रूट प्रोसेसिंग सेंटर या सब्जी मंडी विकसित हो जाए, तो किसानों को काफी फायदा होने लगेगा। यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी और ठेकेदारों के चंगुल से निकला जा सकेगा।

तैयार सब्जियों को बेचता हुए किसान- फोटो : Sirsa

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