फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिरसा: यूक्रेन में फंसे बच्चों की माताओं के झलके आंसू, बोलीं- पैदल ही दूसरे देशों में पहुंच रहे छात्र

Tue, 01 Mar 2022 12:53 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

लवीब और कीव के छात्र यूक्रेन से रोमानियां और पोलैंड पहुंचे। दूसरे देशों में पहुंचे छात्रों को एयर इंडिया से वापस लाया जा रहा है। खारकीव में फंसे विद्यार्थियों ने कहा कि हॉस्टल से कुछ दूर बम बारी हो रही है।
विज्ञापन
अपने बच्चों से बातचीत करने के बाद भावुक हुई बच्चों की माताएं। लघु सचिवालय में अपने बच्चे से बात करते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के परिजनों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। हरियाणा के सिरसा में यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के माता-पिता अपने बच्चों के जल्द वतन वापस बुलाने की मांग को लेकर सोमवार को लघु सचिवालय पहुंचे। उन्होंने उपायुक्त अजय सिंह तोमर से उनके बच्चों को सुरक्षित व जल्द घर वापस लाने की गुहार लगाई। हालांकि परिजनों ने भारत सरकार व प्रधानमंत्री पर भरोसा भी जताया है।

विज्ञापन


इस समय सिरसा जिला के करीब 40 विद्यार्थी यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सो में फंसे हुए हैं। जिनमें अधिकांश खारकीव, लवीब और कीव में फंसे हुए हैं। बीते पांच से यूक्रेन पर रूस की ओर से हमला बोला जा रहा है। जिसके कारण छात्रों के माता पिता की परेशानी पहले से अधिक बढ़ गई है।

वहीं अभिभावकों का कहना है पांच दिनों से लगातार हो रहे बमबारी के दौरान विद्यार्थियों को न तो खाने लायक सामान मिल रहा है और न ही उनके रहने की कोई व्यवस्था है। जहां उन्होंने उपायुक्त से गुहार लगाई की सरकार के साथ बातचीत कर उनके बच्चों को जल्द से जल्द घर वापस लाएं।
विज्ञापन


क्योंकि उनके बच्चे भूख व प्यास से बिलख रहे हैं। हालांकि उपायुक्त ने परिजनों को आश्वासन दिया कि उनकी मांग अमल में लाई जाएगी और सभी बच्चों को सकुशल वतन वापस लाया जाएगा।

वीडियो कॉल पर बच्चों के हालात देखकर भावुक हुई माताएं
उपायुक्त से मिलने के बाद जैसे ही परिजन बाहर आए तो सबसे पहले परिजनों ने अपने-अपने बच्चों के हालात जानने के लिए वीडियो कॉल करना शुरू कर दिया। इस दौरान जैसे ही बच्चों ने यूक्रेन के हालात बताए तो बच्चों की माताएं भावुक हो उठी। मां की आंखों में आंसू देखकर बच्चे भी खुद को रोक न पाए और उनकी आंखों में भी आंसू आने लगे, इन मां और बच्चों के इन भावुक पलों को देखकर वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गई। 

परिजनों ने कहा सरकार पर है भरोसा 
बच्चों के परिजनों ने कहा की हमें सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा विश्वास है की वहां की सरकारों से बातचीत कर हमारे बच्चों को जल्द घर वापस लाएंगे। खाने के लिए उन्हें सामान नहीं मिल रहा है। जगह-जगह ब्लास्ट हो रहे हैं, और इंडियन एंबेसी भी कोई खास मदद नहीं कर रही है। 

कीव से निकल रोमानियां देश में पहुंचे सिरसा के कई छात्र, वापस आने की तैयारी 
रूस की ओर से कीव शहर को कब्जे में लेने को लेकर तैयारी की जा रही है। ऐसे में यहां पर रह रहे कई छात्र कीव से निकलकर रोमानियां देश में पहुंच चुके हैं। यहां पर भारत के लिए आने वाले इंडियन एयरवेज की फ्लाइटों में सवार हो रहे हैं। रोमानियां में पहुंचे छात्र विनित ने बताया कि जैसे तैसे कर वह यूक्रेन से रोमानियां देश में पहुंचे है।

यहां पर उनके लिए कैंप लगाए गए हैं और उन कैंपों में इंडिया के अलग-अलग राज्यों के छात्र ठहरे हुए हैं। वहीं छतरियां निवासी धर्मचंद ने बताया कि उसका बेटा पंकज लवीब से पोलैंड के बॉर्डर पर पहुंचा हुआ है। काफी संख्या में लोग दूसरे देशों की तरफ जा रहे है। जिसके कारण उनकी स्थिति भी खराब हो रही है। पोलैंड में पहुंचने के बाद ही उनके वापस आने की स्थिति की जानकारी मिल पाएगी। 

खारकीव में हो रहे बार बार बम धमाके, स्टोर भी हुए खाली 
वहीं खारकीव में लगातार रूस की ओर से धमाके किए जा रहे हैं। खारकीव के हॉस्टल में हर रहे शुभम कंबोज ने बताया कि उनके हॉस्टल से कुछ दूरी पर अभी भी धमाके हो रहे है। जिनमें लोगों की जान जा रही है। बाहर सामान लेने के लिए निकलते हैं तो इतने में सायरन बजना शुरू हो जाता है।

खारकीव सुपर मार्केट में भी खाने पीने का सामान पूरी तरह से खत्म हो चुका है। जबकि इंडियन एंबेसी की ओर से भी अभी कोई सहायता नहीं मिल पाई है और न ही उनके साथ कोई कांटेक्ट हो पा रहा है। वह हॉस्टल के बेसमेंट में रह रहे हैं। बार बार धमाके होने से उनकी स्थिति खराब हो रही है। 

मां बोली बेटा लेने गया था सामान तभी होने लगी बम बारी 
वहीं बिमला रानी ने बताया कि उसका बेटा वैभव भी खारकीव में रह रहा है। उनके पास खाने का सामान भी खत्म हो चुका है। दोपहर के समय सुपर मार्केट खुली तो वह खाने का सामान लेने के लिए बाहर गए। तभी सायरन बजना शुरू हो गया। जिसके बाद वह सामान लिए बिना ही वापस अपने हॉस्टल में आ गए। हर रोज स्थिति खराब होती जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें