सिरसा। कृषि कानूनों को लेकर इस्तीफा देने के बाद खाली हुई ऐलनाबाद सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर नया मोड़ आ गया है। अब किसान संगठन किसी एक राजनीति दल को समर्थन करने की बजाय स्वयं का प्रतिनिधि चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में किसानों के समर्थन और तीन कानूनों की खिलाफत करके चुनाव जीतने की राजनेताओं की मंशा पर पानी फिरने की आशंका पैदा हो गई है। इस संबंध में बुधवार को सिरसा में आयोजित बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा।
तीन कृषि कानूनों के विरोध में विधायक अभय सिंह चौटाला ने ऐलनाबाद विधानसभा सीट से 27 जनवरी को इस्तीफा दिया था। अब उपचुनाव हो रहे हैं तो इनेलो से एक बार फिर अभय सिंह चौटाला मैदान में आ चुके हैं। अभय सिंह चौटाला स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ जनता से पूछकर ही इस्तीफा दिया था और अब उन्हीं की सहमति से मैदान में आए हैं। इसके अलावा कांग्रेस भी तीन कृषि कानूनों की खिलाफत करते हुए इस चुनाव को भुनाने के प्रयास में है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वे शुरू से किसानों के पक्ष में रहे हैं इसलिए अब उनके समर्थन से ही जीत दर्ज करेंगे। लेकिन दूसरी ओर किसान संगठनों ने किसी एक राजनीतिक दल को खुला समर्थन देने की बजाय अपना स्वयं का प्रतिनिधि मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है।
संयुक्त किसान मोर्चा आज लेगा फैसला, सिरसा में बैठक
हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता जगबीर घसौला ने कहा कि ऐलनाबाद चुनाव की घोषणा के बाद से ही अपना प्रतिनिधि उतारने की बात की थी। लेकिन आज तक फैसला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि अगर 6 अक्तूबर को 12 बजे तक संयुक्त किसान मोर्चा अगर कोई किसान प्रतिनिधि की घोषणा करता है तो हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा उसका समर्थन करेगा अन्यथा इसके बाद अपना प्रतिनिधि घोषित करेगा। इसलिए बैठक होगी और इसमें प्रदेश के लगभग 25 किसान नेता भाग लेंगे।
ये बोले किसान नेता
किसान नेता विकल पचार ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को ऐलनाबाद से एक किसान प्रतिनिधि को चुनाव में उतारना चाहिए था। क्योंकि जब तक कानून बनाने के काबिल किसान के प्रतिनिधि नहीं होंगे तब तक हम किसानों के ऊपर कारपोरेट घरानों के हितैषी नेताओं द्वारा थोपे गए कानूनों का विरोध क्या रोड ऊपर बैठकर ही नारेबाजी करते रहेंगे। किसान नेता प्रदीप धनखड़ ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बार-बार कभी उत्तर प्रदेश मिशन तो कभी पंजाब मिशन की बात उठाई जाती है लेकिन ऐलनाबाद के अंदर जैसे ही चुनाव की घोषणा होती है तो पूरे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के मुंह के ऊपर ताला जड़ा जाता है। इसी कारण हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आगे आकर के ऐलनाबाद चुनाव के अंदर किसान प्रतिनिधि उतारना पड़ रहा है।