सिरसा। मानसून से पहले सिरसा में घग्गर नदी के आसपास बाढ़ आपदा प्रबंधन का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग की दोनों विंग और पंचायती राज विभाग अलर्ट मोड पर हैं ताकि पंचायतों के साथ मिलकर नदी के तटबंधों को सुरक्षित और मजबूत किया जा सके। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मशीनरी और अन्य जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
कटाव रोकने के लिए विशेष पत्थरों का इस्तेमाल
पक्के तटबंधों को मजबूती देने के लिए भारी और बड़े साइज के पत्थर मंगवाए जा रहे हैं। इन पत्थरों का वजन 8 किलोग्राम से 16 किलोग्राम या उससे अधिक है। इस तकनीक से पानी के तेज बहाव में भी मिट्टी के कटाव का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। बाढ़ के दौरान पानी के सुचारु बहाव को बनाए रखने के लिए ओटू हेड पर गाद निकालने और खुदाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
पंपिंग मशीनरी को किया जा रहा दुरुस्त
सिंचाई विभाग की मरम्मत विंग की ओर से पंपिंग मशीनरी की जांच का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। घग्गर के साथ लगते विभिन्न ब्रांचों में पानी निकासी व अन्य पंपिंग सिस्टम को दुरुस्त करने का काम जारी है। टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से काम किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द से मशीनरी को अपग्रेड कर दुरुस्त किया जा सके। घग्गर में जलस्तर बढ़ने के बाद तेजी से दबाव विभागीय मशीनरी पर बढ़ना शुरू हो जाता है। इसलिए पहले ही सभी पंपसेट व अन्य मशीनरी को दुरुस्त करवाने का काम जारी है।
-
पंचायतों और प्रशासन की दोहरी जिम्मेदारी
घग्गर के रोड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 10 से 15 गांवों की सुरक्षा मुख्य रूप से स्थानीय पंचायतों के भरोसे होती है। प्रशासन के स्तर पर पक्के तटबंधों की व्यवस्था की जाती है लेकिन उससे पहले तटबंधों की प्राथमिक मजबूती की जिम्मेदारी पंचायतों और किसानों की होती है।
हाल ही में उपायुक्त और एसडीएम ने मीरपुर, नेजाडेला कलां और फरवाई क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के आदेश जारी किए हैं। पंचायतों ने पिछले साल जिन क्षेत्रों में कटाव हुआ था, उन्हें अपने स्तर पर दुरुस्त कर लिया है। घग्गर के बहाव क्षेत्र में हजारों एकड़ भूमि आती है जहां किसान धान की फसल उगाते हैं। कटाव की स्थिति में किसानों को फसलों का भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
हमारी ओर से विशेष रूप से भारी पत्थर मंगवाए जा रहे हैं। इन पत्थरों की मदद से पक्के तटबंधों को और अधिक मजबूती दी जाएगी। मानसून के आगमन के साथ ही इन्हें संवेदनशील जगहों पर लगाने का काम शुरू हो जाएगा ताकि पक्के तटबंधों पर कटाव की कोई स्थिति पैदा न हो। - रघुबीर सिंह, एसडीएम, सिंचाई विभाग, सिरसा।