बस स्टैंड पर खड़ी रोडवेज बस । संवाद
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सिरसा। रोडवेज बसों में ई टिकटिंग मशीनें से टिकट काटने की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। छह माह से डिपो के स्टोर रूम में नई 210 मशीनें धूल फांक रही हैं। मशीनों का संचालन करने के लिए परिचालकों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अभी भी मैनुअली तरीके से बसों में टिकट काटी जा रही है।
रोडवेज बसों को कैश लैस करने व फ्रॉड रोकने के लिए सरकार ने सभी परिचालकों को ई-टिकटिंग मशीन देने का प्लान बनाया था। इसके लिए छह माह पहले सिरसा डिपो को विभाग ने 210 ई-टिकटिंग मशीनें भी भेज दी थी। इसके बाद एक सप्ताह तक परिचालकों को मशीन के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया गया। लेकिन किराए का मेल न होने के कारण मशीनों से टिकट काटने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। इसके बाद रोडवेज ने मशीनों में किराए की सूची को भी अपडेट किया, लेकिन फिर भी किराये का एक बराबर होना संभव नहीं हो पाया। इसके बाद मशीनों को स्टोर रूम में रख दिया गया।
चंडीगढ़ और दिल्ली रूट पर मशीनों का लिया था ट्रायल
परिचालकों को एक सप्ताह की ट्रेनिंग देने के बाद चंडीगढ़ व दिल्ली के रूट पर इन मशीनों का ट्रायल लिया गया। मशीनों की प्रोसेसिंग स्लो होने और किराये का मिलान सही न होने के कारण ट्रायल कामयाब नहीं हो पाया। इसके बाद परिचालक अब भी मैनुअली तरीके से यात्रियों की टिकट काटते हुए नजर आ रहे हैं।
जिले के 130 रूटों पर 171 बसों का हो रहा है संचालन
जिले के कुल 130 रूटों पर 171 बसों का संचालन हो रहा है। इनमें से कई बसें पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के लिए भी चल रही है। बसों में हर रोज 30 हजार के करीब यात्री सफर करते हैं। दूसरे राज्यों में बसों के पहुंचने के बाद किराये में बदलाव होने के कारण ई टिकटिंग मशीनें उपयोग में नहीं लाई जा रही।
वर्जन
ई टिकटिंग मशीनों को मुख्यालय की ओर से अपडेट किया जा रहा है। मशीनों के पोर्टल को अपडेट करने के बाद ही इनसे टिकट काटने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। - केआर कौशल, रोडवेज महाप्रबंधक, सिरसा।