सिरसा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी (सीबीएसई) से संबंधित स्कूल संचालकों ने सरकार और शिक्षा बोर्ड की ओर से एक वर्ष पहले जारी किए गए आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमर्जी से पुस्तकें लागू कर दी। लेकिन अब जब परीक्षा का समय आया तो विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परेशानी पैदा हो गई है। अब स्कूल संचालक एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदने की हिदायत दे रहे हैं। लेकिन अभिभावकों की समस्या ये है कि बाजार से नई पुस्तकें खरीद लें तो एक महीने में परीक्षा की तैयारी कैसे हो पाएगी।
सरकार ने एक वर्ष पहले फैसला किया था कि सभी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाई करवाई जाए। ये आदेश हरियाणा शिक्षा बोर्ड से संबंधित स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई से संबंधित स्कूलों को भी दिए गए थे। लेकिन सीबीएसई से संबंधित स्कूलों ने आदेेशों के प्रति बेरुखी दिखाते हुए अपनी मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लागू कर दी। लेकिन अब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने आदेश लागू कर दिया कि भी स्कूलों की 8वीं कक्षा की परीक्षा हरियाणा बोर्ड लेगा। ऐसे में स्पष्ट है कि परीक्षा एनसीईआरटी के सिलेबस अनुसार ली जाएगी। इस फैसले से न केवल स्कूलों बल्कि विद्यार्थियों व अभिभावकों में भी हड़कंप की स्थिति है।
ये है समस्या
सीबीएसई से संबंधित स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर की पुस्तकें पढ़ा दी। लेकिन सरकार के आदेश अनुसार अब परीक्षा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड लेगा। ये भी स्पष्ट है कि एनसीईआरटी की पुस्तकों के सिलेबस अनुसार परीक्षा ली जाएगी। ऐसे में परेशानी ये है कि जिन विद्यार्थियों ने निजी प्रकाशकों की पुस्तकें पढ़ी हैं वे ये परीक्षा कैसे देंगे। अब आनन-फानन में सीबीएसई से संबंधित स्कूल भी विद्यार्थियों के अभिभावकों को आदेश दे रहे हैं कि वे एनसीईआरटी की पुस्तकें बच्चो को दे। अभिभावकों कमल शर्मा, गोपाल राम, मुकेश कुमार, रवि कुमार और महावीर शर्मा का कहना है कि बाजार में एनसीईआरटी की पुस्तकों का स्टॉक खत्म है। पुस्तकें मिल भी जाएं, तब भी अब विद्यार्थी एक महीने में तैयारी कैसे करेंगे।
कोर्ट केस का हवाला दे रहे स्कूल संचालक
एनसीईआरटी की पुस्तकों को लगाने को लेकर स्कूल संचालकों का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी है। जिस पर हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला लेते हुए कहा था कि निजी स्कूल अपने स्तर पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को लगा सकते हैं। लेकिन अब अचानक से 8वीं कक्षा की परीक्षाएं हरियाणा बोर्ड में लेने का क्या औचित्य बनता है, यह समझ से परे हैं। सीबीएसई स्कूल संचालकों का कहना है कि 25 फरवरी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक होनी है। उसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
8वीं कक्षा की परीक्षाएं हरियाणा बोर्ड द्वारा लेने के फैसले के बाद बुक डिपो पर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। हर रोज 40 से 50 विद्यार्थी इस समय डिपो पर पहुंच रहे हैं। लेकिन इस समय विद्यार्थी पुस्तक कम खरीद रहे हैं। इसके बदले गैस पेपर ज्यादा मांग है। बुक डिपो पर पुस्तकों की कोई कमी नहीं है। हर प्रकार की पुस्तकें व गेस पेपर इस समय मौजूद हैं।
- संजय मेहता, बुक डिपो
सरकार के फैसले के कारण एनसीईआरटी की पुस्तकें लेने आने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ गई है। विद्यार्थी बुक डिपो पर पुस्तकें और गैस पेपर लेने के लिए आ रहे हैं। हालांकि इस समय डिपो पर पुस्तकों का स्टॉक पूरा है। क्योंकि पिछले दो सालों से इन पुस्तकों की ज्यादा बिक्री ही नहीं हुई है। जिसके कारण स्टॉक उपलब्ध है। वहीं अगर मांग ज्यादा बढ़ी तो और भी पुस्तकें मंगा ली जाएगी।
- हेमंत कुमार, बुक डिपो
ये बोले स्कूल संचालक
अभी तक बोर्ड परीक्षाओं को लेकर कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। शहर में जितने भी सीबीएसई बोर्ड के स्कूल संचालक हैं उनमें इस फैसले को लेकर सहमति नहीं बनी है। बोर्ड के चेयरपर्सन से भी बात हुई है लेकिन कोई सहमति अभी तक नहीं बन पाई है। वहीं स्कूलों द्वारा बोर्ड की परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है।
- नीतू मदान, सीबीएसई कोऑडिर्नेटर सिरसा
इस तरह का फैसला लेने का कोई उचित समय नहीं है। सीबीएसई स्कूल संचालकों ने समय मांगा है। एक बोर्ड दूसरे बोर्ड की परीक्षाएं कैसे ले सकता है। ये नियमों को तोड़ा जा रहा है। 25 फरवरी को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक है जिसके बाद ही फैसला लिया जाएगा।
- राम सिंह यादव, चेयरपर्सन, विवेकानंद स्कूल
बच्चे पिछले एक साल से सीबीएसई के पैटर्न पर तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अचानक से एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने से बच्चे तनाव की स्थिति में हैं। अब मात्र एक महीने में बच्चे परीक्षाओं की तैयारी कैसे करेंगे।
- नरेश सहारण, अभिभावक
पहले सीबीएसई बोर्ड की इतनी महंगी किताबें स्कूलों द्वारा लगा दी गई। जो सभी अभिभावकों ने खरीदी। लेकिन अब एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने के लिए कहा जा रहा है। जो कि गलत है।
- नरेश शर्मा, अभिभावक