संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पाकिस्तान की ओर से शुक्रवार रात हुए मिसाइल हमले के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। शनिवार सुबह सिविल सर्जन डॉ. एमके भादू ने जिलेभर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों की आपात बैठक ली। इस दौरान डॉक्टरों को मुख्यालय न छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही अति इमरजेंसी में पूर्व कर्मचारियों और आरएमपी से सहयोग लिया जाएगा।
आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. वीरेश भूषण ने पीएचसी व सीएचसी प्रभारियों को बताया कि इमरजेंसी की हालात में किसी को हेड क्वार्टर नहीं छोड़ना है। सभी इमरजेंसी के लिए 24 घंटे तैयार रहें। सिरसा के साथ डबवाली, ऐलनाबाद, चोपटा, ओढां, रानियां व कालांवाली केंद्र अलर्ट पर रहें। उन्होंने केंद्रों में तैनात डॉक्टरों से कहा कि हमें मिलकर चेन की भांति काम करना है। सिविल सर्जन सीएचसी से जानकारी लेंगे।
डॉ. वीरेश भूषण ने कहा कि इमरजेंसी में तैयारी ऐसी करें कि घायल को तुरंत प्रभाव से इलाज मिले। उन्होंने कहा कि हवाई हमले के दौरान सबसे पहले डॉक्टर खुद को बचाएं, क्योंकि डॉक्टर सही रहेगा तभी वह घायलों की जान बचा पाएगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई हमला होता है तो तुरंत नीचे लेट जाएं और कानों में अंगुली डाल लें।
आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान डरना बिलकुल भी नहीं है। मरना होगा तो हम घर बैठे भी मर जाएंगे। ये समय देश के लिए कुछ कर गुजरने का है।
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रात में पूरा स्टाफ ड्यूटी पर रहे, उपकरणों की कमी तुरंत करें पूरी
सिविल सर्जन एमके भादू ने सभी पीएचसी व सीएचसी इंचार्ज को निर्देश दिया कि रात में पूरा स्टाफ ड्यूटी पर होना चाहिए। इमरजेंसी सायरन बजने का इंतजार नहीं करना है। उन्होंने इंचार्ज से कहा कि पीएचसी व सीएचसी में जिस उपकरण या चीज की कमी है, तुरंत प्रभाव से उसकी इमरजेंसी खरीद करें। सिविल सर्जन ने पीएचसी और सीएचसी इंचार्ज से कहा कि इमरजेंसी बड़ी हो तो रिटायर्ड हेल्थ कर्मी और आरएमपी को बुला लिया जाएगा। ऐसा तभी करना है जब बहुत ज्यादा इमरजेंसी हालत हों। उन्हें इसके लिए तैयार रहने को बोला जाए।
45 में से 35 एंबुलेंस वर्किंग, बाकी रविवार तक होंगी तैयार
सिविल सर्जन ने जिले के सभी अस्पतालों से एंबुलेंस, रक्त, दवाइयों और जरूरी उपकरणों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस रेडी-टू-वर्क के लिए तैयार होनी चाहिए। सिरसा में कुल 45 एंबुलेंस हैं, जिनमें से 35 कार्यशील हैं। बाकी की मरम्मत करवाई जा रही है और उम्मीद है कि वे रविवार तक तैयार हो जाएंगी। जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों की एंबुलेंस भी ली जा सकती हैं।