फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पैसों की कमी के कारण घर का गुजारा मुश्किल, लेकिन बच्चों को देती है निशुल्क शिक्षा

विज्ञापन
चारपाई पर बच्चों को पढ़ाती आरती अरोड़ा। संवाद - फोटो : Sirsa
विज्ञापन
सिरसा। कहते है कुछ करने की मन में चाह हो तो हर असंभव कार्य संभव हो जाता है। ऐसा ही कुछ सिरसा के रामनगरिया में रहने वाली महिला कर रही है। महिला 100 फीसदी पोलियो ग्रस्त है लेकिन जज्बा इतना है कि ऐसी स्थिति में भी गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही है। महिला पिछले 10 सालों से जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही है। उक्त महिला अब तक करीब 7 से 8 हजार बच्चों को निशुल्क में शिक्षा प्रदान कर चुकी है।
विज्ञापन

आरती अरोड़ा 100 फीसदी पोलियो से ग्रसित है। वहीं आरती चारपाई से हिलडुल भी नहीं सकती है। हर समय चारपाई पर ही अपना जीवनयापन करती है। लेकिन उनका सपना है कि गरीबी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। आरती बताती है कि जीवन में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। वहीं पैसों की कमी होने के कारण वह 10वीं कक्षा में ट्यूशन क्लास नहीं ले पाई थी। तबसे उनके मन में जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क में पढ़ाने की ठानी हुई है।
सास-ससुर ने घर से निकाला बाहर
आरती जब शादी के लायक हुई तो पिता को चिंता सताने लगी। ऐसे में उन्होंने आरती के लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी। लेकिन दिव्यांगता के कारण महिला के लिए कोई योग्य वर नहीं मिला। ऐसे में पड़ोस में रहने वाले युवक ने आरती की दशा देखी थी। जिसके कारण उन्होंने आरती से शादी करने की बात उनके पिता से की। लेकिन इस पर पिता ने युवक से कहा कि बेटी को आधे में कही छोड़कर तो नहीं चले जाओगे। युवक ने आरती के पिता को विश्वास दिलवाया। लेकिन युवक के माता-पिता शादी के लिए नहीं माने। युवक ने आरती से शादी कर ली। इस पर उक्त युवक के माता पिता ने उन दोनों को घर से बाहर निकाल दिया।
विज्ञापन

घर का गुजारा भी मुश्किल, लेकिन बच्चों को देती हैं निशुल्क शिक्षा
आरती अरोड़ा के घर में पति, दो बच्चे व उनकी माता रहती है। महिला का एक लड़का 10वीं कक्षा में है तो दूसरा अभी पहली कक्षा में है। महिला के पति दिहाड़ी का काम करता है। जिनकी आमदनी से घर का गुजारा भी मुश्किल से हो पाता है। लेकिन इसके बावजूद महिला किसी भी बच्चे या संस्था से किसी प्रकार की कोई फीस नहीं लेती है। वहीं महिला सिर्फ उन्हीं बच्चों को पढ़ाती है जो जरूरतमंद है और किसी प्रकार की कोई ट्यूशन फीस नहीं दे सकते हैं। महिला बच्चों को दो शिफ्टों में पढ़ाती है। शाम को 3 बजे से लेकर 6 बजे तक ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें