23 दिसंबर 1995 को डबवाली में अग्निकांड हुआ था? हर साल प्रशासन को यह बात अग्निकांड पीड़ित याद दिलाते हैं। सवाल उठता है कि 20 बरस पहले हुई भयानक अग्नि त्रासदी प्रशासन हर बार क्यों भूल जाता है?
अग्निकांड को लेकर स्मारक बना है, इसे अब तक राष्ट्रीय स्मारक घोषित क्यों नहीं किया गया है? हर वर्ष तीन दिवसीय कार्यक्रम होता है। पूरा का पूरा खर्च 18 अग्निकांड पीड़ित उठाते हैं।
डबवाली अग्निकांड ने 442 जिंदगियां लील ली थी। मरने वालों में सबसे अधिक 258 बच्चे थे। 23 दिसंबर 1996 को अग्निकांड पीड़ित बरसी मनाने के लिए अग्निकांड स्थल पर एकत्रित हुए। एक सामाजिक संस्था के कुछ नुमाइंदों को प्रशासन ने भीतर जाने दिया।
अग्निकांड पीड़ितों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए। उस समय अग्निकांड पीड़ितों ने सवाल दागा था कि आखिर क्यों? प्रशासन की सोच थी कि कहीं अग्निकांड पीड़ित जमीन पर कब्जा न कर लें। वर्ष 1997 में अग्निकांड पीड़ित फिर इकट्ठे हुए। प्रशासन ने दरवाजा खोला।
कार्यक्रम के बाद पुन: ताला जड़ दिया गया। ऐसा वर्ष 2002 तक निरंतर होता रहा। महज बरसी पर ही अग्निकांड स्थल का ताला खुलता। वर्ष 2002 में सरकार ने थोड़ी बहुत सुध ली। वर्ष 2007 तक बिल्डिंग बन गई लेकिन प्रशासन ने सुध नहीं ली।
2007 में स्मारक को निरंतर खोलने के लिए प्रयास शुरू हुए। अग्निकांड पीड़ितों ने बाल कल्याण विभाग की ओर से बाल पुस्तकालय खुलवाया। लेकिन वे भी छोड़ गए। वर्ष 2013 से कुशलता विकास केंद्र तथा ई-लाईब्रेरी चल रही है।
यह सब भी अग्निकांड पीड़ितों के प्रयास से संभव हो पाया। ताकि अग्निकांड स्मारक पर युवा आएं, अग्निकांड त्रासदी की जानकारी प्राप्त करके आग के प्रति जागरूक हो सकें।
हर साल 23 दिसंबर 2015 को सर्वधर्म सभा होती है जिसका पूरा खर्च 18 अग्निकांड पीड़ित उठाते हैं। अग्निकांड की बरसी भूलने वाला प्रशासन यह भूल गया है कि जिस भूमि पर स्मारक बना है, वह भूमि सरकारी है।
आज होगा अखंड पाठ प्रकाश
फायर विक्टिम एसोसिएशन के महासचिव विनोद बांसल ने बताया कि 21 दिसंबर 2015 को अग्निकांड स्मारक पर श्री अखंड पाठ प्रकाश होगा।
22 दिसंबर को रामायण पाठ आरंभ होंगे। 23 दिसंबर को सुबह नौ बजे यज्ञ होगा। इसके साथ ही रक्तदान कैंप शुरू हो जाएगा। रामायण पाठ के भोग के उपरांत श्री अखंड पाठ के भोग डाले जाएंगे। इलाही कीर्तन होगा। बीकानेर से आने वाले स्वामी रामेश्वरानंद कथा करेंगे।
इसके बाद श्रद्धांजलि समारोह होगा। बांसल के अनुसार 20 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब अग्निकांड पीड़ित अग्निकांड स्थल पर मेगा ब्लड कैंप आयोजित कर रहे हैं।
अग्निकांड कभी न भूलने वाला दर्द है। लेकिन राजनीतिक तथा प्रशासन हमेशा भूल जाता है। हर बार उन्हें याद दिलाना पड़ता है।
स्मारक हमेशा खुला रहे, लोग इससे प्रेरणा लें, इसके लिए रखरखाव का पूरा खर्च पीड़ित उठाते हैं। यहां तक की 21 से 23 दिसंबर तक होने वाले आयोजन का पूरा भार पीड़ित उठाते हैं। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझकर इसे राष्ट्रीय या राजकीय स्मारक घोषित करना चाहिए। -विनोद बांसल, महासचिव, डबवाली फायर विक्टम एसोसिएशन, डबवाली
मैंने कुछ समय पहले डबवाली का कार्यभार संभाला है। मुझे नहीं मालूम कि डबवाली अग्निकांड स्मारक की जमीन सरकारी है। यह राजकीय या राष्ट्रीय स्मारक घोषित हो, इसके लिए प्रयास करूंगा। -अजय कुमार, एसडीएम, डबवाली