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प्रतिबंधित नोटों ने दिनभर मचाए रखा हड़कंप

Thu, 10 Nov 2016 01:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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रेलवे ‌टिकट - फोटो : Bureau
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एक हजार व पांच सौ रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की खबर अखबारों व सोशल मीडिया में आने के बाद बुधवार को पूरा दिन लोगों में पशोपेश की स्थिति देखी गई। कुछ तो आम लोगों ने भी ये नोट लेने से कन्नी काटी रखी तो वहीं बैंक व एटीएम बंद होने के कारण लोग पूरा दिन करेंसी को लेकर न केवल पशोपेश में रहे बल्कि एक दूसरे से सौ सौ के नोट पूछते दिखाई दिए। 
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बुधवार को पूरा दिन लोगों में नोटों को लेकर हड़कंप की स्थिति देखी गई। आलम ये था कि पेट्रोल पंपों पर लोगों की काफी भीड़ देखी गई। जिन लोगों ने 100 रुपये कर तेल डलवाना था वो भी हजार व पांच सौ रुपये के नोट लिए हुए था। उधर पंप संचालकों ने हालांकि नोट लेने से इनकार तो नहीं किया लेकिन उन्होंने इसे विकल्प के रूप में लेते हुए 100 के नोट वापस देने की बजाय तेल डलवाने की बात कही। ऐसे में पंप संचालकों की बिक्री में इजाफा रहा।

विद्युतकर्मियों ने किया रुपये जमा करने से इनकार, हंगामा
गांव चोरमार में विद्युत निगम केे कर्मचारियों ने पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेने से इनकार कर दिया। इस पर वहां जमकर हंगामा हुआ। दरअसल बुधवार को गांव में बिजली बिल भरवाने हेतु कर्मचारी पहुंचे हुए थे। उपभोक्ता जब हजार व पांच सौ रुपये के नोट लेकर पहुंचे तो कर्मचारियों ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। जिसके चलते लोगों और कर्मचारियों में बहस हुई। कर्मचारियों ने आदेशों का हवाला देकर लोगों को समझाया। लेकिन फिर भी लोगों ने विद्युत निगम के अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उन्हें भी आदेशों की बात दोहरा दी गई। बिल भरने आए ग्रामीण सेवक सिंह सिद्धू, कुलदीप सिंह, रूली सिंह, बिकर सिंह, जसवीर सिंह, मलकीत सिंह आदि का कहना था कि सरकार का फैसला तो सराहनीय है लेकिन गांव में बिल न भरे जाने के कारण उस पर लगने वाला जुर्माना कौन भरेगा। गांव में काफी उपभोक्ता ऐसे भी थे जिनका बिल हजारों में था और उन्होंने बिल भी भरना था लेकिन कर्मचारियों ने हजार व पांच सौ के नोट लेने से इनकार कर दिया।
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सौ-सौ के नोट मिलेंगे क्या
जिन लोगों के पास हजार व पांच सौ के नोट थे वे दुकानों व अन्य जगहों पर चलाते नजर आए, लेकिन आगे से हर कोई कन्नी काटता नजर आया। लोग एक दूसरे से सौ-सौ के नोट पूछते नजर आए लेकिन हर कोई ना ही कहता नजर आया। पूरा दिन लोग इस कदर परेशान थे कि दुकानदार पांच सौ रुपये के नोट वाले व्यक्ति को संदेहजनक नजरों से देखकर हंसता हुआ नजर आया जैसे कि उसने नकली नोट ले रखा हो और उसकी ठगी पकड़ी गई हो। निजी स्कूलों, स्टडी केंद्रों या अन्य जगहों पर लोग एडवांस में ही फीस भरते देखे गए।

बुजुर्गों ने भी निकाली अपनी पूंजी
आमतौर पर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े बुजुर्ग बुढ़ापा पेंशन या बचत आदि के जरिए पैसे जोड़ कर रखते हैं ताकि बुढ़ापे में परिवार पर आश्रित न रहें। जैसे ही उन्हें करेंसी बंद होने की खबर मिली तो उन्होंने घबराहट में अपनी पूंजी को टटोलना शुरू कर दिया। कई बुजुर्गों के पास तो हजार व पांच सौ रुपये  के इतने नोट देखे गए कि उनके परिजनों को भी इसका अंदाजा नहीं था।

देखिए ऐसी कोई हड़कंप वाली बात नहीं है 30 दिसंबर तक बैंक करेंसी चेंज करेगा। जिसके लिए हमने सौ-सौ के नोटों की करेंसी का व्यापक प्रबंध कर लिया है। एक बार मेें 10 हजार रुपये व एक सप्ताह में 20 हजार रुपये की करेंसी चेंज करवा सकते हैं। लोग किसी की अफवाहों में न आकर आराम से 30 दिसंबर तक करेंसी चेंज करवा सकते हैं। उपभोक्ताओं के मद्देनजर हमने व्यापक प्रबंध किए हैं और पुलिस का भी सहयोग मांगा है।
- नरेश कुमार, प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक ओढां


कालांवाली में अफरा  तफरी
मोदी सरकार द्वारा मौजूदा 500 व 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के बाद बुधवार को मंडी में अफरा-तफरी जैसा माहौल देखने को मिला। लोग 500 व 1000 का नोट लेकर कल रात से ही इधर-उधर भाग रहे हैं। पेट्रोल पंपों पर आज खासी भीड़ देखी गई। हर कोई 500 या 1000 रुपये का नोट लेकर ही पेट्रोल पंप पर पहुंचा, लेकिन जब उन्हें 500 या फिर 1000 रुपये का तेल ही डालने को कहा गया तो वे निराशा के भाव में दिखे। हर कोई किसी की चाहत थी कि तेल के बहाने ही खुले कर लिए जाएं। यहीं हाल मेडिकल स्टोरों पर भी रहा। यहां भी 10 रुपये की दवा लेने के बहाने 500 रुपये लेकर लोग पहुंचे, लेकिन यहां भी खुले की व्यवस्था नहीं थी। सबसे ज्यादा परेशानी यात्रियों को हुई। कंडक्टर के पास खुले नहीं थे और यात्रियों के पास 500 से कम का नोट नहीं था। ऐसे में उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में खासी परेशानी हुई। बाजार पर भी इसका असर देखा गया। सब्जी से लेकर अन्य दुकानदारों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। जिन लोगों के पास छोटे नोट हैं भी वे बड़े नोट चलाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कहीं भी 500 व 1000 रुपये का नोट नहीं चला, जिसका असर बाजार भी पड़ा। बाजारों में आज खरीददारी बहुत कम हुई।
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