हरियाणा के सिरसा में चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। पीएचडी की सीटें बढ़ाने के लिए सीडीएलयू ने नये प्रावधान जोड़ दिए हैं। इसके तहत अब कॉलेज के प्राध्यापक भी पीएचडी स्कॉलर्स के लिए को-सुपरवाइजर की भूमिका निभा सकेंगे। इससे विश्वविद्यालय के विभागों में पीएचडी की उपलब्ध सीटें दोगुनी हो जाएंगी।
साथ ही अब जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) उत्तीर्ण विद्यार्थियों का दाखिला कभी भी पीएचडी में हो सकेगा, उनके लिए कोर्स वर्क की अनिवार्यता खत्म करने के साथ-साथ कई नई सुविधा उपलब्ध करवाई हैं। इस संबंध में सीडीएलयू ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
सीडीएलयू के करीब 16 विभागों में पीएचडी कोर्स की सुविधा है क्योंकि केवल इन विभागों में ही नियमित प्राध्यापक हैं। अभी तक पीएचडी की सीमित सीटें थी क्योंकि यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सीटें निर्धारित होती हैं, लेकिन अब सीडीएलयू ने शोध कार्य बढ़ाने के लिए नया विकल्प ढूंढ निकाला है।
अब विश्वविद्यालय के नियमित प्राध्यापकों के साथ-साथ कॉलेजों में कार्यरत प्राध्यापक भी पीएचडी करवा सकेंगे। उन्हें को-सुपरवाइजर के रूप में जोड़ा जाएगा। को-सुपरवाइजर बनने के इच्छुक कॉलेज प्राध्यापकों से आवेदन मांग लिए हैं। इसके लिए 28 मार्च तक आवेदन किए जा सकते हैं। आवेदन आने के बाद डीएन एकेडमिक, डीन रिसर्च और संबंधित विभाग के चेयरमैन पर आधारित कमेटी रिपोर्ट देगी और को-सुपरवाइजर के रूप में जोड़ा जाएगा।
ऐसे आया आइडिया और हुआ फैसला
राजकीय नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संदीप गोयल सीडीएलयू के वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक से मिले। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे विश्वविद्यालय के प्राध्यापक पीएचडी करवाने के लिए गाइड की भूमिका निभाते हैं, ऐसे ही कॉलेज के प्राध्यापक भी करवा सकते हैं। ये आइडिया वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक को अच्छा लगा और उन्होंने मंथन शुरू कर दिया।
नियम खंगाले तो विकल्प निकलकर सामने आया। इससे आइडिया आया कि इससे कॉलेज प्राध्यापक विश्वविद्यालय के विभागों के साथ मिलकर शोध का काम करवा सकते हैं। इससे पीएचडी की सीटें बढ़ जाएंगी। यूजीसी का नियम है कि विश्वविद्यालय का एक प्राध्यापक अपनी योग्यता अनुसार 5 या 8 को ही एक समय में पीएचडी करवा सकता है। ऐसे में यदि को-सुपरवाइजर मिलता है तो पीएचडी की सीट दोगुणा हो जाएगी।
ये होगा लाभ
- नए प्रावधान के तहत सुपरवाइजर और को-सुपरवाइजर होने से पीएचडी की प्रत्येक सीट को आधा गिना जाएगा यानी पीएचडी की सीट प्रत्येक विभाग में दोगना हो जाएंगी।
- पीएचडी में दाखिला के दौरान प्रवेश परीक्षा होती है, लेकिन जेआरएफ यानी जूनियर रिसर्च फेलोशिप परीक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों का सीधा दाखिला पीएचडी में हो सकेगा।
- ये भी जरूरी नहीं है कि दाखिला होते ही कोर्स वर्क करवाएं। दाखिला होने के बाद जब भी अगले वर्ष कोर्स वर्क होगा, उसमें भाग ले सकेंगे।
- सीडीएलयू में रिसर्च कार्य को बढ़ावा मिलेगा और नैक की रैंकिंग में भी सुधार होगा।
- जेआरएफ पास जो विद्यार्थी दाखिला से वंचित रह गए थे, उन्हें मौका मिल पाएगा।
28 मार्च तक मांगे हैं आवेदन, उसके बाद कमेटी लेगी फैसला : प्रो. एसके गहलावत
अब कॉलेज के प्राध्यापक विश्वविद्यालय में पीएचडी कोर्स करवाने के लिए को-सुपरवाइजर की भूमिका निभा सकेंगे। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। साथ ही इच्छुक प्राध्यापकों से आवेदन भी मांगे गए हैं। 28 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद कमेटी फैसला करेगी। विद्यार्थियों को लाभ होगा क्योंकि पीएचडी की सीटें बढ़ेंगी और कॉलेज के प्राध्यापक भी रिसर्च वर्क करवा सकेंगे। - प्रो. एसके गहलावत, डीन एकेडमिक अफेयर्स, सीडीएलयू, सिरसा।