सिरसा। मानसून से पहले शहर के बारिश के पानी की निकासी की समस्या के समाधान पर लोकसभा चुनावों ने रोक लगा दी है। शहर से बारिश के पानी की निकासी के लिए नगर परिषद द्वारा बनाए गई 35.92 करोड़ रुपये की परियोजना एडमिन अप्रूव्ड के बाद अटक गई है। क्योंकि आचार संहिता लग गई है। ऐसे में अब जून माह में इस परियोजना को दोबारा से गति मिल पाएगी।
यदि सही तरह से परियोजना को गति मिलती है तो जुलाई माह में परियोजना सिरे चढ़ सकती है। ऐसे में जुलाई-अगस्त में मानसून चरम पर होता है। ऐसे में साफ है कि आचार संहिता का असर यह होगा कि इस साल भी शहरवासियों को बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण परेशानी होगी। अधिकारी चाहकर भी कोई ठोस समाधान बारिश के पानी की निकासी का नहीं कर पाएंगे।
बता दें कि नगर परिषद की ओर से अक्तूबर 2022 में पुराने शहर का सर्वे करवाया गया था। इस सर्वे के अनुसार बारिश के पानी की निकासी के लिए विस्तृत सर्वे रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने मुख्यालय से काम पूरा करवाने के लिए बजट मांगा था। बजट मिलने के साथ एडमिन अप्रूव्ल भी मुख्यालय से मिल गई थी।
सर्वे में यह था खास
नगर परिषद के अधिकारियों के मुताबिक मुख्यालय से इंजीनियर्स की टीम आई थी। टीम ने शहर के भीतरी क्षेत्र का निरीक्षण कर डीपीआर तैयार की थी। इस सर्वे के अंदर उन सभी जगहों को टीम ने देखा था, जहां पर बारिश के समय में पानी ठहरता है। वह चाहे कॉलोनियों की गलियां हो या शहर की मुख्य सड़कें हो। शहर में जनता भवन, पुराने पुल के पास, अनाजमंडी, शिव चौक, रोड़ी बाजार, हिसारिया बाजार, वाल्मीकि चौक से नागरिक अस्पताल रोड, बेगू रोड, कीर्तिनगर, अग्रसेन कॉलोनी, राम कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, रानियां रोड, एफ ब्लॉक आदि क्षेत्र में जलभराव अधिक हो रहा है।
क्यों जरूरी है यह परियोजना
शहर में बारिश के पानी की निकासी की लाइन बिछाना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बारिश के पानी की निकासी सीवरेज सिस्टम के माध्यम से होती है। बारिश के दिनों में सीवरेज सिस्टम ब्लॉक हो जाता है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो सीवरेज सिस्टम केवल शौचालय के पानी की निकासी के हिसाब से बनाया गया है। इसमें बारिश के पानी की निकासी का कोई प्रावधान नहीं होता है। ऐसे में ज्यादा बारिश होने से सीवरेज सिस्टम ब्लॉक हो जाता है। इसका मुख्य कारण है कि बारिश के पानी में सड़कों की मिट्टी साथ बहकर आती है जो सीवरेज लाइनों में जम जाती है। इसके जमने से सीवरेज ब्लॉक हो जाते हैं। इसलिए बारिश के पानी पानी की निकासी के लिए अलग से व्यवस्था होना जरूरी है।
बारिश के पानी की निकासी के लिए मुख्यालय से 35.92 करोड़ रुपये की परियोजना को एडमिन अप्रूव्ल मिल चुकी है। लोकसभा चुनावों के बाद ही इस परियोजना को गति मिलेगी।
- प्रवीण शर्मा, जेई , नगर परिषद, सिरसा।