डबवाली। डबवाली नगर परिषद में सोमवार को होने वाली पार्षदों की बैठक विवाद और हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होने से पहले ही कांग्रेस व जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) समर्थित पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इस कारण कोरम पूरा नहीं हो सकता और बैठक को स्थगित कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने नगर में राजनीतिक उथल-पुथल को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
बैठक का मुख्य मुद्दा सेक्शन 35 के तहत बिना प्रस्ताव पारित किए गए खर्च और एजेंडों को लेकर था। कांग्रेस और जेजेपी समर्थित पार्षदों ने चेयरमैन टेकचंद छाबड़ा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह विधायक आदित्य देवीलाल चौटाला की कठपुतली बनकर कार्य कर रहे हैं। बिना पार्षदों की जानकारी के मनमाने ढंग से विकास कार्यों को एजेंडा में शामिल कर रहे हैं। इस पर दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई।
कांग्रेस-जेजेपी पार्षदों का विरोध
बैठक का बहिष्कार करने वाले पार्षदों में सुमित अनेजा, दीपक बाबा, विक्की छाबड़ा, सुनील छीदा, अरुण गर्ग सहित कई अन्य पार्षद शामिल थे। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक को लगभग छह महीने हो चुके हैं, लेकिन इस बीच कोई बैठक नहीं बुलाई गई। अब अचानक सेक्शन 35 का हवाला देते हुए कई एजेंडों को बिना जानकारी और अनुमोदन के बैठक में शामिल किया गया है। जब पार्षदों ने इन एजेंडों की जानकारी मांगी, तो उन्हें कोई दस्तावेज़ या सूचना उपलब्ध नहीं करवाई गई। इससे स्पष्ट पता चला कि कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है और मिलीभगत से काम हो रहा है। पार्षदों के मुताबिक, बिना प्रस्ताव पारित किए खर्च किया जाना नियमों का उल्लंघन है और यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।
बंदरों व बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर बुलाई गई आपातकालीन बैठक
चेयरमैन टेकचंद छाबड़ा ने बताया कि शहर में बंदरों और आवारा पशुओं की समस्या विकराल हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपातकालीन स्थिति में सेक्शन 35 के तहत एजेंडा डालकर उसे जिला नगर आयुक्त के पास मंजूरी हेतु भेजा था। यह निर्णय पूर्णतः जनहित में लिया गया था। कोई पार्षद कुछ भी कहे दोबारा बैठक बुलाई जाएगी।
ईओ ने दी कानूनी स्थिति की जानकारी
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सेक्शन 35 के तहत चेयरमैन को आपात स्थिति में एजेंडा डालने का पूरा अधिकार है। सभी कार्य नियमानुसार ही किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत जनहित के मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकते हैं और यही प्रक्रिया इस बार भी अपनाई गई।
कांग्रेस और जेजेपी के पार्षदों के आरोप पूरी तरह से निराधार है। पार्षद विकास कार्यों में बांधा डालने का काम कर रहे हैं। बैठक को स्थगित करवाने का काम सोची समझी साजिश के तहत किया गया है। ये कुछ ऐसे पार्षद हैं, जो जब भी शहर के विकास कार्य की बात आती है, बाधा बन जाते हैं।
टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन नगर परिषद