वृद्ध आश्रम में अपनी पत्नी के साथ रघुबीर यादव।
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सिरसा। बीते 75 वर्षों से जिस प्रकार अमर उजाला समाचार पत्र लोगों की समस्याएं और उनके मुद्दों को उठा रहा है। उसी प्रकार 75 वर्षीय बुजुर्ग भी अपने अनुसार लोगों को इंसाफ और उनकी मदद करने में लगे हुए हैं। समाचार पत्र में प्रकाशित होने वाली समाचारों से बुजुर्ग भी प्रेरित हो रहे हैं।
घर से निकाले बुजुर्गों की देेखरेख कर रहे 75 वर्षीय रघुबीर
कुछ कर गुजरने का हौसला मन में हो तो उम्र आड़े नहीं आ सकती। चत्तरगढ़पट्टी के रहने वाले रघुबीर इस समय 75 वर्ष के हैं। लेकिन जज्बा किसी युवा से कम नहीं हैं। रघुबीर इस समय घर से निकाले हुए बुजुर्गों की देखरेेख कर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करते हैं। रघुबीर ने शहर के चत्तरगढ़पट्टी में अपने ही घर में वृद्धाश्रम में बनाया हुआ है। जिसमें उनके पास इस समय 18 बुजुर्ग रहते हैं। जिनकी देखरेख का पूरा जिम्मा वो खुद ही उठाते हैं। उनका मानना है कि कोई भी बेघर न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने इस आश्रम को स्थापित किया है।
बीएसफ में तैनात थे रघुबीर
75 वर्षीय रघुबीर बीएसएफ रिटायर से हुए है। जिसके बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों में भाग लेना शुरू किया। 2008 में उन्होंने एक एनजीओ का गठन किया। शुरूआत में इस एनजीओ से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं जुड़ी। उन महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट के तहत प्रशिक्षण दिया गया।
बुजुर्गों की देखरेख के लिए रखा है स्टाफ
रघुबीर स्वयं की आय से सलाना 3 से 4 लाख रुपये तक आश्रम में देते हैं। रघुबीर स्वयं भी आश्रम में रहते हैं। वहीं बुजुर्गों की देखरेख के लिए तीन लोगों का स्टाफ भी रखा हुआ है।