पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के गांव चौटाला के किसान सफेद मक्खी से खराब हुई कॉटन की फसल का मुआवजा पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि विपक्षी दल के नेताओं का गांव होने के कारण उन्हें मुआवजे से वंचित रखा जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया, जब अधिकारियों से मुआवजे के बारे में पूछा जाता है तो वे कहते हैं धरना लगा दो।
किसान नंद राम, महेंद्र गोदारा, बलवीर कडवासरा, प्रेमसुख, प्रहलाद तथा दया राम ने बताया कि मार्च 2016 में सरकार ने सफेद मक्खी से खराब हुई कॉटन का मुआवजा तय करके आवंटन के लिए प्रशासन को भेजा था। पूरे जिला में सबसे अधिक मुआवजा गांव चौटाला में बंटना था। उनके गांव का रकबा करीब 52 हजार एकड़ है। ऐसे में करीब सात करोड़ रुपये मुआवजा के रूप में बंटने थे।
लेकिन प्रशासन राजनीतिक कारणों के चलते जानबूझकर मामला लटका रहा है। मुआवजा की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिले के सबसे बड़े गांव में एक पटवारी नियुक्त कर रखा है। यहीं नहीं निलंबित चल रहे नंबरदार को मामला उगाही करने के लिए लगाया हुआ है। उपरोक्त नंबरदार की जमीन कुर्क करने के लिए प्रशासन प्रयासरत है। इसके बावजूद वही नंबरदार वर्षों पुराना उनका मामला भरवा रहा है।
जोकि न्यायोचित नहीं है। उन्हें डराया जा रहा है कि अगर वे मामला नहीं जमा करवाएंगे तो उन्हें मुआवजा नहीं मिलेगा। इस संबंध में वे कई दफा प्रशासन से संपर्क स्थापित करके अपनी शिकायत दर्ज करवा चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे धरना लगा लें, फिर मुआवजा बंटेगा। किसान नंद राम ने बताया कि पटवारी उनसे ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर करवा रहा है। यहां मुआवजा नहीं भरा। उनके बारे में शेष तथ्य भरे हुए हैं। महेंद्र गोदारा ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से वह फार्म लेकर घूम रहा है। पटवारी कहता है कि उसके पास अब समय नहीं है।
सूची में नाम दो बार
एडवोकेट रामभक्त कड़वासरा ने बताया कि मुआवजा संबंधी दो सूचियां जारी हुई हैं। पहली तथा दूसरी सूची में उसका नाम दो बार लिखा हुआ है। ऐसे करीब पचास-साठ किसान ऐसे हैं, जिनको सूची में दो बार दर्ज किया गया है। प्रशासन सूची की जांच करवाकर जल्द मुआवजा वितरण करे।
सुलग रहा मुआवजा मामला
करीब तीन माह से ज्यादा समय निकलने के बाद भी प्रशासन किसानों को मुआवजा वितरण नहीं कर पाया है। जबकि किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। ऐसे में किसान संगठन मुआवजा के लिए पुन: तैयार हो रहे हैं। धीरे-धीरे मामला सुलग रहा है। किसान संगठनों ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है।