सिरसा। रिश्वत मामले में पकड़े गए सीआईए डबवाली के तत्कालीन इंचार्ज सब इंस्पेक्टर अजय कुमार ने एक बार फिर चौथी पर सत्र न्यायालय में नियमित जमानत याचिका दायर की है। याचिका पर फैसला 7 मई को आएगा। इससे पहले जेल से बाहर आने के लिए अजय कुमार ने 3 बार अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीके लाल की अदालत में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि पुलिस ऑफिसर एक जिम्मेदार पद होता है। ऐसे में शिकायतकर्ता की मां को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर आरोपी सब इंस्पेक्टर अजय कुमार ने दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी। आरोपी जमानत का दुरुपयोग करके वर्तमान गवाहों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आरोपी जमानत की रियायत का हकदार नहीं है। इसलिए उसकी जमानत याचिका को खारिज किया जाता है। इसके बाद आरोपी अजय कुमार ने पंजाब एंड हाईकोर्ट में याचिका लगाई। यहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली।
कई बार की कोशिश, नहीं मिली राहत
आरोपी अजय कुमार ने पहली बार सितंबर 2021 को जमानत याचिका लगाई थी। इसे न्यायालय ने 8 सितंबर को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने दिसंबर 2021 को याचिका लगाई। न्यायालय ने इसे भी खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। यहां से उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद 6 अप्रैल 2022 में याचिका लगाई। यह भी खारिज हो गई।
स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने पकड़ा था
बता दें कि शिकायतकर्ता सुक्खा सिंह ने विजिलेंस डीजी को दी शिकायत में बताया था कि उसका पिता बलदेव सिंह एनडीपीएस एक्ट में जिला जेल में है। कोरोना संक्रमण के समय उसके पिता को 42 दिनों की पैरोल मिली थी। हार्ट की बीमारी के कारण उसका पिता तय समय पर वापस जेल नहीं जा पाया। इसके बाद उसके पिता का वारंट जारी हो गया। 15 जून को डबवाली सीआईए इंचार्ज एसआई अजय कुमार उनके घर आया और पिता को पकड़ लिया। इसके बाद अजय कुमार कहने लगा कि पूरे परिवार को धारा 216 में गिरफ्तार करेगा। अगर बचना है तो तीन लाख रुपये देने होंगे। पांच जुलाई को डीएसपी कैलाश के नेतृत्व में विजिलेंस ब्यूरो की टीम सिरसा पहुंची। इसके बाद सुक्खा सिंह ने एसआई अजय कुमार को अपनी अनाज मंडी स्थित आढ़ती की दुकान में बुलाया। एसआई अजय कुमार ने सुक्खा से दो लाख रुपये रिश्वत के लिए तो तुरंत विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया।