जगसीर सिंह के शरीर को जमीन में दबाए हुए।
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उपमंडल के गांव जगमालवाली में वीरवार को सुबह पशुओं के लिए चारा बनाते समय एक किसान की मौत हो गई। मृतक की पहचान जगसीर सिंह निवासी गांव जगमालवाली के रूप में हुई है। मृतक के परिजनों के बयानों के आधार पर कालांवाली पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम करवाया। जानकारी अनुसार करीब 51 वर्षीय जगसीर सिंह जिसका घर चकेरियां पर स्थित ढाणी में है।
वह सुबह पशुओं के लिए बिजली चालित टोके या मशीन से चारा बना रहा था। इस दौरान जब जगसीर सिंह की मां उससे खाने के बारे में पूछने गई तो उस समय जगसीर सिंह बिजली चालित टोके की चपेट में आया हुआ था। जिसके बाद जगसीर सिंह की मां ने अपने पोते और पड़ोसियों को सूचित किया। जिसके बाद उन्होंने तुरंत निजी चिकित्सक को बुलाकर उसकी जांच करवाई और निजी चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन उसके परिजनों ने जगसीर सिंह के शरीर में मात्र सांस होने की बात कहते हुए मिट्टी में कई घंटों तक दबाए रखा। लेकिन कई घंटों बाद भी जगसीर सिंह के शरीर में कोई हलचल न होने पर उसके परिजनों ने कालांवाली पुलिस को सूचित कर शव का पोस्टमार्टम करवाया।
बता दें कि मृतक जगसीर सिंह की पत्नी का कई साल पहले ही देहांत हो चुका है। मृतक जगसीर सिंह अपनी बूढ़ी मां और एक अविवाहित लड़के को पीछे छोड़ गया। वहीं थाना प्रभारी रोहताश कुमार ने बताया कि मृतक जगसीर सिंह के भाई श्रवण सिंह के बयानों के आधार पर पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया।
चार घंटे तक मिट्टी में दबाए रखा शव
गांव जगमालावाली में उस समय एक अनोखा मंजर देखने को मिला। जहां जगसीर सिंह को जिंदा करने के लिए उसके परिजनों व ग्रामीणों ने करीब 4 घंटे तक मिट्टी में दबाए रखा। इस दौरान वे जगसीर सिंह के चेहरे, हथेलियां और पैर को बाहर रखकर आटे और देसी घी से मालिश करते रहे। लेकिन कई घंटों बाद भी जगसीर सिंह के शरीर में कोई हलचल न होने से उसके परिजनों की आस टूट गई। परिजनों का कहना था कि ऐसा करने से करंट का असर खत्म हो जाता है और व्यक्ति जिंदा हो जाता है। उसी के चलते उन्होंने ऐसा किया।