धनतेरस को लेकर सरसाई नगरी के बाजार पूरी सज गए हैं। बाजारों में धनतेरस को धन की वर्षा का दिन माना जाता है इसलिए कारण बर्तन और सराफा दुकानों को विशेष रूप से सजाया गया है।
इस बार सोने और चांदी के भाव नीचे हैं, इससे व्यापारियों को उम्मीद है कि सोने और चांदी की ज्वैलरी की खरीदारी जमकर होगी।
ज्वैलरी व्यापारियों मुताबिक इस बार ग्राहकों का रुझान हॉलमार्क ज्वैलरी के प्रति अधिक है। ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए व्यापारी आकर्षक डिजाइनों में ज्वैलरी लाए हैं।
सर्राफा व्यवसाई अविनाश अरोड़ा ने बताया कि ज्वैलरी की दुकानों पर हॉलमार्क ज्वैलरी आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध है। इसके अलावा बर्तन बाजार में पीतल, तांबे, स्टील के बर्तनों की धूम है।
बर्तन व्यापारी किशोर कुमार ने बताया कि धनतेरस पर हमेशा की तरह इस वर्ष भी अच्छी बिक्री होने की आशा है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की दुकानें भी सज गई हैं।
इस बार की दिवाली में पुराना रंग-ढंग दिख रहा है। दिवाली का जोश तो नया है, लेकिन पुरानी सोच और परंपराएं एक बार फिर जीवंत होती दिख रहीं हैं।
धनतेरस पर इस बार लोग कीमती धातुओं के बर्तन खरीदने और दिवाली पर मिट्टी के दीयों से रोशनी करने का मन बना रहे हैं। लोग एक बार फिर अपनी पुरानी परंपराओं और पुराने चलन की ओर लौट रहे हैं।
यह बदलाव खानपान से लेकर पहनावे में देखने को मिल रहा है। दिवाली पर पहनने को महिलाएं साड़ियों के बजाय लहंगा-चोली पसंद कर रहीं हैं। दुकानदारों की माने तो इस बार खरीददारी के ट्रेंड में बदलाव है।
धनतेरस पर सिरसा जिले में लगभग सभी प्रकार के कारोबार पर जमकर धन बरसेगा।
बर्तन से लेकर सर्राफा, कपड़ों से लेकर ऑटो, दीये से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद व पटाखों की बिक्री मिलाकर कुल 50 करोड़ रुपये का कारोबार धनतेरस पर होगा।
धनतेरस का दिन इन चीजों की खरीददारी के लिए अति शुभ माना जाता है और लोग बाजारों में जाकर बढ़ चढ़कर खरीददारी करते हैं।
25 से 30 करोड़ का सराफा बाजार
रोड़ी बाजार में बर्तनों का कारोबार करने वाले इशांत गाबा का कहना है कि सिरसा शहर में बर्तनों की 64 दुकानें हैं। डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां व कालांवाली को मिलाकर दुकानों की संख्या करीब 100 होती है।
धनतेरस पर पांच से सात करोड़ रुपये का बर्तन कारोबार होगा। काफी लोग विवाह शादियों के लिए बर्तन की खरीददारी भी धनतेरस पर करना पसंद करते हैं।
सराफा कारोबारी रामेश्वर का कहना है कि इस बार धनतेरस के दिन सिरसा का सराफा कारोबार 25 से 30 करोड़ रुपये तक पहुंचेगा।
पांच करोड़ का कपड़ा बाजार
कपड़ा कारोबार की बात करें तो इस कारोबार से जुड़े श्रवण कुमार का कहना है कि प्रत्येक वर्ष कपड़े की जितनी बिक्री होती है उसका 60 प्रतिशत एक ही दिन धनतेरस पर बिक जाता है।
जिन परिवारों में शादियां अगले दो से चार माह के बीच शादियां होने वाली हैं वे इस दिन को काफी शुभ मानते हुए जमकर खरीददारी करते हैं। धनतेरस पर करीब पांच करोड़ का कपड़ा कारोबार सिरसा में होगा।
तीन करोड़ का ऑटो बाजार
ऑटो कारोबार पर इस दिन बेहद गुलजार रहता है। लोगों को इस पर्व पर वाहनों की खरीददारी करना बहुत भाता है। साइकिल से लेकर बाइक, स्कूटी, कार व गाड़ी की काफी खरीददारी होती है।
काफी लोग तो पहले से ही बुकिंग भी करवाते हैं। धनतेरस पर ऑटो मोबाइल का कारोबार करीब तीन करोड़ का कारोबार होने का अनुमान है कारोबारी लगाए बैठे हैं।
तीन से चार करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक बाजार
बात इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय की करें तो इस पावन पर्व पर इस बाजार में काफी बूम देखने को मिलता है।
लोग इलेक्ट्रॉनिक की छोटी लड़ी से लेकर फ्रिज, पंखे, मिक्सी, टीवी, वॉशिंग मशीन की खरीददारी करते हैं। जिले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक कारोबार तीन से चार करोड़ रुपये तक रहेगा।
दो से तीन करोड़ का पटाखा बाजार
जहां तक बात पटाखा बिक्री पर है तो जिलेभर में दीपावली पर्व पर सिरसा वासी दो से तीन करोड़ रुपये पटाखे पर खर्च करते हैं। केवल धनतेरस के दिन ही एक करोड़ रुपये के पटाखों की ब्रिकी सिरसा में होगी।
कीमती धातुओं की चमक
धनतेरस पर्व पर धातुओं के बर्तन और सोना-चांदी खरीदने की परंपरा शुरू से रही है। स्टेनलेस स्टील की री-सेल वैल्यू न होने के कारण इस बार लोग कीमती धातुओं के बर्तनों को तरजीह दे रहे हैं।
लोगों का मानना है कि इन धातुओं की कीमत कभी कम नहीं होती। इसमें खाना बनाने से भोजन की पौष्टिकता बढ़ जाती है।
इसी प्रकार धनतेरस पर देखने में भारी और वजन में हल्के आभूषणों की ज्यादा बिक्री की संभावना है। बर्तन और सर्राफा दुकानदारों ने बदलती सोच के अनुसार अपनी दुकानें सजाईं हैं।
मिट्टी के दीयों से रोशन होंगे घर
दीपावली पर्व के लिए दीये खरीदना भी धनतेरस को शुभ माना जाता है। बिजली संकट को देखते हुए लोग बिजली की झालरों की अपेक्षा मिट्टी के दीयों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से बिजली की झालरों के साथ मोमबत्तियों का चलन बढ़ा था, लेकिन इस बार लोगों की सोच बदली है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मिट्टी के दीयों की खरीददारी पिछले वर्षों की अपेक्षा दो से तीन गुना बढ़ गई है।
छंटेगी बाजार में छाई मंदी
छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक का माना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने के साथ ही इस बार पिछले सालों की तुलना में कम खरीददारी हुई है।
धनतेरस से सभी को बहुत उम्मीद है। शहर के रोड़ी बाजार, भादरा बाजार, पालिका बाजार व सदर बाजार स्थित सभी दुकानें शानदार तरीके से सजी हुई हैं।
कपड़ा कारोबारी विवेक का कहना है कि धनतेरस को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ी है। आशा है कि धनतेरस बाजार में छाई मंदी को हटा देगी।