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भिवानी: प्रधानमंत्री के भाषण से प्रेरित होकर सेठ कृष्ण जिंदल ने अपने गांव सूई को सुधारने का उठाया बीड़ा, आज देखने आए राष्ट्रपति

Wed, 17 Nov 2021 04:16 PM IST
प्रमोद कुमार संजय कोकचा, अमर उजाला, बवानीखेड़ा (भिवानी)

सार

सेठ कृष्ण जिंदल के जिस गांव सूई में बुधवार को राष्ट्रपति आए, उस गांव को सुधारने का बीड़ा उन्होंने पीएम का भाषण देखकर किया था। उन्होंने बताया कि अब गांव में आरओ सिस्टम लगवाएंगे। एक खेल नर्सरी बनाने की बात भी उन्होंने की। राष्ट्रपति ने उनके कामों की तारीफ की। उनसे हर कोई प्रेरणा ले सकता है।
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गांव में कराए विकास के कामों की जानकारी देते कृष्ण और कृष्णा जिंदल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भिवानी जिले के गांव सूई निवासी सेठ कृष्ण जिंदल ने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर दिए भाषण से प्रेरित होकर अपने पैतृक गांव को सुधारने का बीड़ा उठाया था। 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के एमएलए व एमपी को एक-एक गांव गोद लेकर उसे सुधारने की अपील की थी। कृष्ण जिंदल भी टीवी पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम देख रहे थे। उसी से मन में प्रेरणा जागृत हुई और उन्होंने अपने गांव सूई के पिछड़ेपन को सुधारने का बीड़ा उठाया। 7 साल में करीब 25 करोड़ की राशि खर्च कर गांव में विकास कार्य करवाकर सूरत बदल दी।

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राष्ट्रपति से मिली जब काम की तारीफ
उन्हीं कार्यों की आधारशिला रखने व विकास कार्यों का अवलोकन करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 17 नवंबर को गांव सूई में आए। गांव में किए गए विकास कार्यों के बारे में जिंदल परिवार ने बताया कि 25 करोड़ की राशि खर्च कर गांव में विकास कार्य किए जा चुके हैं। इसके बाद उनका अगला कदम होगा कि गांव के जोहड़ को दो हिस्सों में बांटकर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना। उन्होंने बताया कि एक हिस्से में पशुओं के लिए पेयजल व दूसरे हिस्से में बड़ा आरो प्लांट लगाकर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया जाएगा। 
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उन्होंने बताया कि इसके अलावा वे गांव में एक वृहद खेल नर्सरी भी बनाना चाहते हैं, जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी खिलाड़ी तैयार किए जा सकें। खेल नर्सरी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और इसमें देश का कोई भी खिलाड़ी तैयारी कर सकेगा। कृष्ण जिंदल ने बताया कि इसके लिए वे केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से पिछले दिनों मिल भी चुके हैं। जैसे ही मंत्रालय से अनुमति मिल जाएगी तो वह गांव में खेल नर्सरी का निर्माण करवा देंगे।

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गांव के प्रति है विशेष स्नेह
83 वर्षीय कृष्ण जिंदल के पिता परमेश्वर जिंदल गांव में कृषि का कार्य करते थे। परिवार की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। छोटी उम्र में ही उनकी माता हरदेई चल बसी थीं। दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद कृष्ण जिंदल 100 रुपये उधार लेकर यहां से मुंबई चले गए और छोटा-मोटा अपना कार्य शुरू कर दिया। कड़ी मेहनत के चलते चंद दिनों में ही बडे़ बिजनेसमैन बन गए और करोड़ों का कारोबार स्थापित कर लिया, परंतु वे अपने गांव और गांव वासियों को नहीं भूले। इसी बीच वे वर्ष में एक बार अपनी कुलदेवी देवसर माता धाम में पूजा करने के लिए आते और ग्रामीणों से मिलते थे। कृष्ण जिंदल मुंबई में भी समाजसेवा के कार्य करते रहे और उन्होंने वहां के पिछड़े क्षेत्र भी 12 स्कूलों का निर्माण कर सरकार को सुपुर्द कर दिया। जब 2014 में प्रधानमंत्री ने आह्वान किया तो उनके मन में अपने गांव की हालत सुधारने की ठानी।

गांव में करवाए विकास कार्य
कृष्ण जिंदल ने गांव में सरकारी स्कूल का नया भवन निर्माण करवाया व आधुनिक सुविधाओं से लैस साइंस लैब व पुस्तकालय का निर्माण करवाया। 6 एकड़ में झील का निर्माण करवाया। गांव में सात उद्यान बनवाए। गोशाला का निर्माण करवाया। पूरे गांव में इंटरलॉक की गलियां बनवाईं। जरूरतमंद परिवारों के लिए शौचालय बनवाए। गांव में छह बड़े हॉल सहित एक सभागार बनवाया, जिसमें एक साथ 500 व्यक्ति कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। गांव में 250 सौर ऊर्जा की स्ट्रीट लाइटें का निर्माण करवाया, जो रात को गलियों को जगमग करती रहती है। बतौर कृष्ण जिंदल उसके परिजन समाजसेवा के कार्य में उनका बराबर सहयोग करते हैं।

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कृष्णा जिंदल ने लगाए गांव में ढाई हजार पौधे
कृष्ण जिंदल की पत्नी कृष्णा जिंदल ने गांव के स्कूल, मंदिर, रामबाग, उद्यान, झील, स्टेडियम, गोशाला, सार्वजनिक स्थानों व सड़क किनारे ढाई हजार फलदार व छायादार पौधे लगाए हैं, 80 वर्षीय कृष्णा देवी जिंदल ने करीब 2 वर्ष पहले गांव में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम छेड़ी और शीशम, नीम, बरगद, पीपल, अमलतास, आम, शहतूत, अमरूद, नींबू, पपीता, आडू, इमली व चीकू सहित करीब ढाई हजार पौधे लगाए हैं। वे लोगों को जन्मदिवस, शादी की सालगिरह सहित विभिन्न अवसरों पर उपहार स्वरूप पौधे भेंट करती हैं।

पुत्रवधू करती हैं युवाओं की काउंसलिंग
कृष्ण जिंदल की पुत्रवधू 54 वर्षीय ममता जिंदल भी अपने परिवार के समाजसेवा कार्य में बराबर हाथ बंटाती हैं। ममता जिंदल ने बताया कि वह करीब एक डेढ़ माह बाद मुंबई से गांव सूई में आ जाती हैं और लोगों को घर-घर जाकर समस्या पूछती हैं। उनकी समस्या को अपने ससुर तक पहुंचाती हैं। इसके बाद उनके पति अजय, पुत्र ईशान, उसकी सास कृष्णा व ससुर कृष्ण जिंदल मिलकर ग्रामीणों की समस्या के समाधान ढूंढते हैं। 

ममता ने बताया कि वह गांव के युवक-युवतियों को उनके करियर को लेकर परामर्श भी देती हैं। गांव के गरीब जरूरतमंद विद्यार्थी उनके पास अकसर परामर्श लेने के लिए आते हैं। ममता ने बताया कि उसकी हार्दिक इच्छा है कि गांव के युवक पढ़-लिखकर आगे बढ़ें। ममता ने बताया कि जिस समाजसेवा की नींव उनके ससुर ने रखी है, भविष्य में वे भी इस कार्य को अनवरत जारी रखेंगी। ममता ने बताया कि उन्होंने अमेरिका से एमबीए किया है। 

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