पर्यावरणविदों का कहना है कि यह नई परिभाषा वैज्ञानिक नहीं है और इससे अरावली का बड़ा हिस्सा (करीब 90 प्रतिशत) संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में बड़े पैमाने पर खनन और निर्माण गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे जल संरक्षण, जैव विविधता और मरुस्थलीकरण रोकने में अरावली की भूमिका प्रभावित हो सकती है।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र ने सभी राज्यों को अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टे देने पर पूर्ण रोक लगा दी है। पर्यावरण मंत्रालय का कहना है कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है और नई परिभाषा से संरक्षण मजबूत होगा। साथ ही, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) को अतिरिक्त संरक्षित क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है।यह सुनवाई अरावली के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट क्या फैसला लेता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।