डेरा-सिख विवाद के चलते गांव चोरमार में यातायात जाम करने के छह वर्ष
पुराने मामले में अदालत ने बुधवार को पंथक सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत
सिंह दादूवाल और श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार सभा के प्रदेशाध्यक्ष
सुखविंद्र सिंह खालसा सहित नौ लोगों को बरी कर दिया।
16 जुलाई 2007
को ओढ़ां पुलिस ने संत बलजीत सिंह दादूवाल, सुखविंद्र सिंह खालसा, रणजीत
सिंह, गुरविंद्र सिंह, शेर सिंह, गुलजार सिंह, दीदार सिंह, जसवीर सिंह,
जंगीर सिंह उर्फ जगतार सिंह और बग्गा सिंह को नामजद करते हुए चोरमार में
यातायात जाम करने के आरोप में धारा 341/148/149 के तहत मामला दर्ज किया
था।
सुनवाई के दौरान दीदार सिंह की मृत्यु हो गई थी। इस मामले को
लेकर छह सालों में करीब 70 तारीखें पड़ी। नौ सरकारी गवाह पेश हुए, जिसमें
मंगल सिंह, दलबीर सिंह, गुरमीत सिंह, सतपाल, धर्मपाल, पंजाब सिंह, जगदीश
चंद्र, कुलदीप सिंह और मनोज कुमार शामिल रहे। उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी
अमित शर्मा की अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद गवाहों के
बयानों के आधार पर फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
एक साल पहले पता चला मुझ पर केस दर्ज है : दादूवाल
पंथक
सेवा लहर के प्रमुख संत बलजीत सिंह दादूवाल ने बताया कि दिसंबर 2012 को
इंग्लैंड से वापस आते समय अमृतसर हवाई अड्डे पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया
गया, तब पता चला कि उनके ऊपर ओढ़ां थाने में मुकदमा चल रहा है। इससे पूर्व
उन्हें कोई सूचना नहीं थी। मामला पूरी तरह झूठा था। वोटों की राजनीति के
चलते सरकार ने डेरे के इशारे पर केस दर्ज करवाया था। उन्हें पूरा विश्वास
था कि अदालत न्याय करेगी। उन्होंने कहा कि वे धर्म प्रचारक हैं और वे
प्रचार और कीर्तन करते हैं। सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उम्मीद है कि
अन्य डेरा-सिख विवाद से संबंधित उन पर चल रहे केसों में भी उन्हें इंसाफ
मिलेगा। उधर, श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार सभा के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र
सिंह खालसा ने कहा कि सच की जीत हुई है।