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आधुनिकीकरण के नाम पर निजीकरण नहीं होने देंगे : एसजी मिश्रा

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कार्यक्रम में एस जी मिश्रा को सम्मानित करते आयोजक। संवाद
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रोहतक। रेलक र्मियों की सबसे बड़ी यूनियन ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि आधुनिकीकरण के नाम पर रेलवे का निजीकरण नहीं होने देंगे। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी पूरी नहीं हुई। सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियां जारी हैं। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो पब्लिक को साथ लेकर कई संगठनों का संयुक्त मोर्चा बनाकर 14 मार्च के बाद देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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वीरवार को रेलवे विश्राम गृह में पत्रकार वार्ता में मिश्रा ने कहा कि सरकार की नीतियां कर्मचारी विरोधी हैं। कोरोना काल में जब सब कुछ बंद था जब रेल कर्मियों ने दिन रात ड्यूटी की। जानजोखिम में डालकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई। श्रमिकों को उनके गांव पहुंचाया। 1.60 लाख रेलकर्मी संक्रमित हुए। तीन हजार रेल कर्मियों की मृत्यु हुई, लेकिन इन सबके बावजूद कोरोना योद्धा नहीं माना गया। मृतक आश्रितों को 50 लाख की अर्थिक मदद नहीं मिली। यूनियन ने विरोध किया तो 2816 मृतक कर्मियों के आश्रितों को नौकरी दी गई। पारिवारिक विवादों की वजह से कुछ कर्मियों के आश्रितों को नौकरी का मामला अभी लंबित है।
उन्होेंने कहा कि रेल मंत्री रेलवे की पुरानी संपत्तियों को बेचकर रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण करने की बात कर रहे हैं। यूनियन को आधुनिकीकरण से कोई एतराज नहीं है, लेकिन आधुनिकीकरण के नाम पर रेलवे का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग उठा रहे हैं, राजनीतिक दल भी समर्थन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही। कोरोना की वजह से यूनियन अभी तक बड़ा कदम नहीं उठा सकी। अब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। 14 मार्च तक चुनावी प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इसके बाद फेडरेशन सरकार के खिलाफ संसद पर आंदोलन चलाएगी। इसके लिए विभिन्न वर्ग, व्यापारी, अधिवक्ता, छात्र, समाजसेवी संगठनों को साथ लेक र एक संयुक्त मोर्चा बनाया जा रहा है। हर प्रदेश में सभी जिलों में इसका गठन होगा। इस मोर्च के साथ संसद से सड़क पर जन आंदोलन चलाया जाएगा। शुरुआत में छोटे स्तर पर ज्ञापन दिए जाएंगे, इसके बाद बड़े स्तर पर काम होगा। इस दौरान एनआरएमयू के अध्यक्ष का. एसके त्यागी, अनूप शर्मा, एसके सैनी आदि मौजूद रहे।
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52-56 घंटे तक लगातार काम करते हैं स्टेशन मास्टर
मिश्रा ने कहा कि रेलवे में सिक्योरिटी स्टाफ के करीब ढाई लाख पद खाली हैं। नॉन सिक्योरिटी वाले तीन लाख पद रिक्त हैं। इन्हें नहीं भरा जा रहा। रेलकर्मी कई-कई शिफ्ट में लगातार काम करते हैं। हालत ये है कि स्टेशन मास्टर कई-कई शिफ्ट में 52 से 56 घंटे तक काम कर रहे हैं। उन्हें आराम तक नहीं मिलता। परिवार के साथ वक्त नहीं बिता पाते। रायबरेली डिपो में 1986 कर्मी काम करते हैं और दो हजार रेल के डिब्बे रोज बनते हैं। फिर भी सरकार निजीकरण कराना चाहती है। ये तो कर्मचारियों के साथ अन्याय ही है। इस संबंध में फेडरेशन की केंद्र सरकार और रेलवे के उच्चाधिकारियों से वार्ता हुई है।
शेयर मार्केट में जा रहे पैसे की क्या गारंटी
मिश्रा ने कहा कि रेलकर्मी के वेतन से 10 प्रतिशत रकम फंड से कट रही है। सरकार की तरफ से 14 प्रतिशत डालती है लेकिन ये रकम शेयर मार्केट में लग रही है। आगे शेयर मार्केट की क्या स्थिति होगी। कर्मी की जरूरत के वक्त मार्केट कै सा होगा। उसे कितनी रकम मिलेगी कुछ पता नहीं। कर्मी के उस पैसे की गारंटी भी कुछ नहीं है। इसलिए पुरानी पेंशन बहाली जरूरी है।
कार्यालय का किया शुभारंभ
रेलवे मेेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने रेलवे स्टेशन परिसर स्थित नॉर्दन रेलवे मेंस यूनियन के जीर्णोद्धार के बाद तैयार कि ए गए कार्यालय का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने यूनियन पदाधिकारी और कर्मियों से कहा कि निजीकरण के विरोध में सभी एकजुट होकर आंदोलन को तैयार रहें। अपनी मांगों के लिए बडे़ स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा।
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