प्रदेश सरकार ने लाल डोरे और टीपी (टाउन प्लानिंग) स्कीम में आने वाली जमीन भी नगर निगम में शामिल कर दी है। इस वजह से अभी तक डेवलपमेंट चार्ज नहीं देने वाले पुराने शहर और सात गांवों के करीब 70 हजार मकान डेवलपमेंट चार्ज की जद में आ गए हैं।
अब इन मकानों में यदि कोई निर्माण कार्य कराया जाएगा तो डेवलपमेंट चार्ज (विकास शुल्क) देना होगा। यही नहीं इन जगहों पर नया प्लाट लेकर निर्माण कराया जाएगा तो भी डेवलपमेंट चार्ज देना होगा। इस वजह से इन जगहों के पार्षदों में रोष है। आरोप है कि इस तरह के नियम से लोगों पर बोझ डाला जा रहा है। पार्षदों ने कहा है कि वह निगम हाउस की बैठक में इसके खिलाफ प्रस्ताव पास करेंगे।
नगर निगम के वार्ड 12, 13, 14, 15 में पुराना शहर बसा है। पुराने शहर की जमीन लाल डोरे में आती है। इस वजह से यहां पर अभी तक डेवलपमेंट चार्ज नहीं लगता था। इसके अलावा, निगम के दायरे में आने वाले सात गांवों सुनारिया कलां, सुनारिया खुर्द, कोताना, पहरावर, खेड़ी साध, बलियाणा, बोहर की जमीन भी लाल डोरे में आती है।
इन जगहों से न प्रापर्टी टैक्स लिया जाता है और न ही डेवलपमेंट चार्ज। नए नियमों के अनुसार लाल डोरे की जमीन डेवलपमेंट चार्ज के दायरे में रखी गई है। इस कारण पुराना शहर के लगभग 32 हजार मकान और सात गांवों के 38 हजार मकान डेवलपमेंट चार्ज के दायरे में आ गए हैं। अब यहां कोई भी अपने मकान में नया निर्माण कार्य करता है तो उसे नक्शा पास कराने के लिए डेवलपमेंट चार्ज देना होगा।
डेवलपमेंट चार्ज काफी ज्यादा कर दिया गया है, जिसे आम आदमी नहीं भर सकता है। प्लाट लेना, उस पर घर बनाना और डेवलपमेंट चार्ज भरना, इस तरह से कई मार पड़ जाती है। इसके लिए सभी पार्षदों से बात की जाएगी और डेवलपमेंट चार्ज को पहले की तरह कराने के लिए कहा जाएगा।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
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पुराना शहर बसा हुआ है और वहां सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में वहां डेवलपमेंट चार्ज क्यों लिया जाए? वहां केवल रखरखाव होता है और उसके लिए प्रापर्टी टैक्स, कामर्शियल टैक्स लिया जाता है। लोगों पर बिना वजह बोझ डाला जा रहा है। सभी पार्षदों से बात कर रहे हैं। इसका विरोध किया जाएगा।
- नीरा भटनागर, पार्षद वार्ड 14