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अनाज मंडी के बाहर लगीं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइनें

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नई अनाज मंडी के पास सड़क पर लगे जाम में फंसे किसान। संवाद
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नई अनाज मंडी में गेट पास जारी करने की सुस्त रफ्तार से किसान परेशान हो गए हैं। मंडी के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइनें लग रही हैं। किसान सभा ने मंडी के उप सचिव से मुलाकात कर मांग की कि कंप्यूटर ऑपरेटर बढ़ाए जाएं और चारों गेट से किसानों को एंट्री दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या हल न हुई तो वे अपनी ट्रैक्टर ट्रॉलियां डीसी दफ्तर ले जाएंगे।
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कोई भी कृषि उपज बेचने के लिए मंडी में एंट्री से पहले किसानों को गेट पास बनवाना होता है। अनाज मंडी के दो गेटों से किसानों को एंट्री दी जा रही है। वहां लगे दो धर्मकांटों के साथ एक-एक कंप्यूटर लगे हैं। इस तरह दो कंप्यूटर ऑपरेटर ही गेट पास जारी करते हैं। अक्सर सॉफ्टवेयर में समस्या आने से काम रुकता रहता है। किसानों को छह-छह घंटे लग जाते हैं। वहीं, भिवानी चुंगी से सुनारिया चौक को जाने वाली सड़क पर ट्रैफिक जाम लग रहा है। सोमवार को भी कई घंटे तक किसान और लोग जाम में फंसे रहे। किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि मार्केट कमेटी जानबूूझ कर कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त नहीं कर रही है। खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। मंडी के चार गेट हैं लेकिन एंट्री सिर्फ दो से ही हो रही है। अगर बाकी दोनों गेट भी खोल दिए जाएं तो समय कम लगेगा। जबकि, मार्केट कमेटी के अधिकारी कहते हैं कि अगर बाकी दोनों गेटों से एंट्री दी गई तो शहर में जाम लग जाएगा, वह संभव नहीं है। कंप्यूटर ऑपरेटर एक-दो दिन में दो से बढ़ाकर चार कर दिए जाएंगे। जिला सचिव सुमित दलाल ने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल मंडी के उप सचिव से मिल कर समस्याएं बताई हैं। अगर जल्द समाधान न हुआ तो किसान अपनी ट्रॉलियां डीसी दफ्तर ले जाने पर मजबूर होंगे। प्रतिनिधिमंडल में अत्तर सिंह हुड्डा, ओम प्रकाश कादियान, खेमचंद आदि शामिल रहे।
इसलिए आई समस्या
पिछले साल तक सभी किसानों के लिए गेट पास जरूरी नहीं था। जो किसान निजी व्यापारियों को फसल बेचने आते थे, उनके लिए गेट पास अनिवार्य नहीं था। जो किसान एमएसपी पर सरकारी खरीद के तहत अपनी फसल बेचने आते थे, वे भी पहले ट्रॉली अंदर ले जाते थे, फिर बाहर आकर गेट पास बनवा लेते थे। लेकिन इस सरकार के निर्देश हैं कि कोई भी किसान कृषि उपज बेचने आए तो गेट पास के बाद ही उसकी एंट्री होगी। इसलिए मंडी के बाहर कतारें लग रही हैं।
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