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नौनंद के चंद ग्रामीणों के विरोध से नहीं बन सका उपकेंद्र, होगा बिजली संकट

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नौनंद में चंद ग्रामीणों के विरोध के चलते सात साल बाद भी 220 केवी उपकेंद्र नहीं बन सका है, जबकि चार वर्ष पहले इसके लिए 16 एकड़ जमीन भी अधिग्रहीत की जा चुकी है। शासन-प्रशासन व एचवीपीएन (हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम) की ओर से समय रहते इसे बनवाने पर ध्यान नहीं दिया गया तो आम उपभोक्ताओं को बिजली संकट झेलना होगा। वहीं, निगम को मजबूरन आम उपभोक्ताओं व उद्योगों को बिजली और नये कनेक्शन देना बंद करना होगा। उधर, निगम अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उपकेंद्र नहीं बना तो एक वर्ष बाद ही बिजली संकट खड़ा हो जाएगा। जनता को बार-बार बिजली कटौती की मार झेलनी होगी। एचवीपीएन आगामी दो-तीन साल की संभावित बिजली खपत के हिसाब से उपकेंद्र बनाने की योजना बनाता है। निगम की ओर से वर्ष 2014 में नौनंद में 220 केवी उपकेंद्र बनाने का फैसला किया गया। वर्ष 2017 में गांव की 16 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर ली। इसके बाद सब स्टेशन बनाने की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली। इसकी भनक लगते ही नौनंद के कुछ ग्रामीणों ने उपकेंद्र का विरोध कर दिया। निगम की ओर से उन्हें समझाने पर भी वे अड़े रहे। इसके बाद मामला प्रशासन के पास पहुंचा। प्रशासन ने भी विरोध करने वालों से बात की, लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रशासन ने पूरी स्थिति से शासन को अवगत करा दिया है। इसके बाद भी कोई रास्ता नहीं निकल सका है।
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यह है हकीकत
एचवीपीएन के अनुसार रोहतक जिलों में बिजली आपूर्ति 220केवी खोखरा कोट, 220केवी सांपला, 220केवी भड़ाना व 220केवी नूना माजरा (दोनों झज्जर के पास) से होती है। इन सब स्टेशनों से बिजली आपूर्ति 100 फीसदी क्षमता से हो रही है। अब इन पर अतिरिक्त लोड नहीं डाला जा सकता है। ऐसे में उद्योगों को नये कनेक्शन देना मुमकिन ही नहीं है। यदि कनेक्शन दे दिया जाता है तो ओवरलोडिंग की समस्या बढ़ जाएगी। इस दौरान उद्योगों को कनेक्शन तो मिल जाएंगे, लेकिन आम जनता को बिजली संकट झेलना पड़ेगा।
जिले के उद्योगों में हर माह 450 लाख यूनिट की है खपत
वर्तमान में उद्योगों में हर माह औसतन 449 से 450 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। अब सरकार ने उद्योगों को रात्रि में सस्ती बिजली देने की योजना शुरू की है, जिससे खपत बढ़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में नये कनेक्शन देने से गंभीर बिजली संकट उत्पन्न होगा।
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कहीं इन वजहों से तो नहीं हो रहा कोई फैसला
बिजली निगम अधिकारियों का मानना है कि किसान आंदोलन अथवा यूपी में चुनाव नजदीक होने की वजह से शासन-प्रशासन स्तर से कोई सख्त फैसला नहीं हो रहा है।
अब स्थान बदलना मुमकिन नहीं, भूमि भी ले चुके
निगम अधिकारियों का कहना है कि उपकेंद्र के लिए 16 एकड़ जमीन अधिगृहीत करके टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। ऐसे में सब स्टेशन के लिए दूसरा स्थान चुनना संभव नहीं है। यदि ग्रामीणों को विरोध करना था तो शुरू में ही करते ताकि स्थान बदल सकते।
खपत बढ़ रही, भविष्य में बिजली आपूर्ति संभव नहीं
नौनंद में 220 केवी का उपकेंद्र जल्द नहीं बना तो बिजली संकट होना तय है। जिले में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है। इससे भविष्य में आपूर्ति संभव नहीं होगी। ऐसे ही हालात रहे तो उद्योगों को नये कनेक्शन और बिजली देनी मुश्किल हो जाएगी।
-अश्वनी कुमार रहेजा, चीफ इंजीनियर आपरेशन (यूएचबीवीएन)
जनता को बार-बार बिजली कटौती झेलनी होगी
सब स्टेशन नहीं बना तो आने वाले दिनों में गंभीर बिजली संकट होगा। चारों 220केवी उपकेंद्र से 100 फीसदी आपूर्ति हो रही है। ऐसे हालात रहे तो उद्योगों को नये कनेक्शन नहीं मिल सकेंगे। जनता को भी बार-बार बिजली कटौती झेलनी होगी।
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-वीपी सिंह, अधिशासी अभियंता (एचवीपीएन)
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