संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) की ओर से आयोजित विश्व के सबसे बड़े थिएटर फेस्टिवल भारत रंग महोत्सव (भारंगम) का 25वां संस्करण इस वर्ष देश-विदेश के 44 शहरों में आयोजित किया जा रहा है।
हरियाणा में इस प्रतिष्ठित महोत्सव की मेजबानी दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय को मिली है। यहां चार दिवसीय नाट्य महोत्सव की शुरुआत सोमवार को हुई।
महोत्सव के पहले दिन दिल्ली के प्रज्ञा थिएटर ग्रुप ओर से ‘उम्मीद: मनुष्य जिंदा है’ नाटक का मंचन किया गया। यह नाटक प्रसिद्ध लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने लिखा है जबकि इसका निर्देशन लक्ष्मी रावत ने किया।
1:40 घंटे तक चली प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। उम्मीद: मनुष्य जिंदा है केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं बल्कि समाज को नफरत की जगह करुणा, संवाद व समझदारी अपनाने की सशक्त अपील है।
नाटक में दुर्गा पूजा पंडाल से बंटवारे तक की यात्रा
नाटक की शुरुआत दुर्गा पूजा के पंडाल से होती है जहां एक मूर्ति टूटने की घटना के बाद अफरा-तफरी मच जाती है। जब यह पता चलता है कि घटना से जुड़ा बच्चा दूसरे धर्म का है तो भीड़ उग्र हो जाती है। एक हिंदू डॉक्टर उस बच्चे को अपने घर में छिपाकर इंसानियत की मिसाल पेश करता है लेकिन उन्मादी भीड़ तर्क और समझ से परे होकर हिंसा पर उतर आती है। कहानी इसके बाद दर्शकों को 1947 के बंटवारे के दौर में ले जाती है जहां डॉक्टर मोहल्ले के उन लोगों की दास्तान सुनाता है जिन्होंने दंगों के बीच भी दोस्ती, प्रेम और पड़ोस की जिम्मेदारी निभाई।
दंगों से ज्यादा इंसानियत की कहानी
यह दंगों की नहीं बल्कि उन जिंदा बची मानवीय रिश्तों की कहानी है जो नफरत के दौर में भी कायम रहे। प्रस्तुति बंटवारे की हिंसा, टूटन और स्मृतियों से उपजे दर्द को सामने लाती है और यह संदेश देती है कि इतिहास को भूलने के बजाय उससे सीख लेना जरूरी है।
सशक्त अभिनय और तकनीकी पक्ष
नाटक में पीतांबर सिंह चौहान, कुसुम चौहान, विक्रांत शर्मा, प्रज्ञा सिंह रावत, जगमोहन सिंह रावत, बबली अधिकारी सहित बड़ी टीम ने शानदार अभिनय किया। मिंटू शर्मा ने स्टेज प्रॉपर्टी, शिवांकर देशवाल ने संगीत, कमल किशोर ने लाइटिंग जबकि अक्षय डोबरा व रीना रतूड़ी ने सहायक निर्देशन की जिम्मेदारी निभाई।
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सारंग में आज दिखेंगे तमिल भाषा के रंग
रोहतक। सुपवा में मंगलवार को महिलाओं पर आधारित एक नाटक तमिलनाडु की टीम प्रस्तुत करेगी जो दो भाषाओं में होगा। वहीं, मंडी हाउस-द बैंड की टीम भी म्यूजिक प्रस्तुति देगा। सुबह सबसे पहले रंगकर्मी व निर्देशक लक्ष्मी रावत का संवाद सत्र होगा। कूथु लोक रंगमंच की तरफ से सुब्रमणिया भारती टीम के साथ पेन नदई कूथु-महिलाओं की चाल नामक नाटक प्रस्तुत होगा। यह नाटक महिला कट्टैक्कुट्टू कलाकारों के वास्तविक जीवन के अनुभवों से प्रेरित है। इसमें रंगमंच व समाज में महिलाओं की भूमिका, संघर्ष और बदलाव को दिखाया जाएगा। यह नाटक अंग्रेजी व तमिल भाषा में होगा। द बैंड के संस्थापक देवेंद्र अहिरवार जोर से प्यार लगा है नाटक प्रस्तुत करेंगे। यह एक संगीतमय रंगमंच प्रस्तुति होगी जिसमें कविता, कहानी व सजीव संगीत के माध्यम से प्रेम और मानवीय भावनाओं को व्यक्त किया गया है। इस प्रस्तुति में उनके साथ तुषार कदम, रजत तिवारी व लाइव बैंड शामिल रहेगा।