गैंगवार के चलते निंदाना के गबदू और उसके साथी की हिसार के गांव पुट्ठी में हत्या कर दी गई। इससे गांव में तनाव है। जिले के अंदर सैमाण और रिटौली के बाद निंदाना गांव में कानून व्यवस्था पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। क्योंकि गैंगवार के चलते अब तक गांव के चार युवकों की हत्या हो चुकी है और दोनों गैंग से जुड़े युवा जेल में न्यायिक हिरासत के चलते बंद हैं।
रविवार को हिसार के नारनौंद के गांव पुट्ठी से बेड़वा रोड पर कार सवार दो युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिनकी पहचान अमित उर्फ गबदू और उसके साथी संदीप के रूप में हुई है। हमलावर उनकी कार के पीछे लगे थे। उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई थीं। एक युवक की गाड़ी के अंदर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे को खेतों में भागते हुए मारा गया है। गांव के अंदर गैंगवार के चलते अब तक चार हत्याएं हो चुकी हैं। तीन हत्या निंदाना तो एक फरमाना में की गई है। इससे पहले 27 फरवरी 2021 को गांव के बाहर सुनसान मकान में बैठे पांच युवकों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिसमें विकास निवासी निंदाना व अंकुश निवासी फरमाना की मौत हो गई थी। सुमित और एक अन्य युवक घायल हो गए थे।
कुछ दिन पहले भी की थी हत्या की कोशिश
निंदाना में शराब ठेके के पास कुछ दिन पहले भी एक युवक की गोली मारकर हत्या करने का प्रयास किया गया था, लेकिन गनीमत यह रही कि वह युवक बच गया था। बताया जा रहा है कि गांव में कई साल से डीसी व गबदू गैंग के बीच दुश्मनी चली आ रही थी। कई बार मारपीट भी हुई थी। दोनों पक्ष के लोगों पर कई-कई मामले भी दर्ज हैं। डीसी अभी भी जेल में बंद है। गांव में अब यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि गबदू के मौत के बाद यह दुश्मनी समाप्त होगी या और भी गंभीर परिणाम होंगे, लेकिन कोई भी ग्रामीण इस पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है।
सैमाण और रिटौली में हो चुकी हैं हत्याएं
जिले के अंदर सैमाण और रिटौली गांव में आपसी रंजिश व गैंगवार के चलते कई हत्याएं हो चुकी हैं। महम खंड के ही गांव सैमाण में पिछले साल रोहित नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी। फिर अशोक टेलर को मौत के घाट उतार दिया गया था। हालांकि पुलिस मामलों में मुख्य आरोपी विकास उर्फ मटरी को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि रिटौली गांव में 2022 में ही तीन हत्याएं हो चुकी हैं। मार्च में पहले दो लोगों की एक दिन में हत्या की गई, जबकि एक सप्ताह बाद एक बस चालक की हत्या की गई थी। पुलिस रिटौली के एक गैंग के ज्यादातर साथियों को दबोच चुकी है, लेकिन दूसरे गैंग से हिमांशु उर्फ भाऊ पुलिस की गिरफ्त से अब भी बाहर है।