नगर निगम की आय के प्रमुख स्रोत एक लाख 88 हजार भवनों से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की जानी है। तमाम कोशिश के बाद भी निगम लक्ष्य से काफी दूर है। चालू वित्तीय वर्ष में निगम का लक्ष्य 50 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स वसूलना है, जो अभी तक करीब पांच करोड़ ही मिला है।
कोरोना की वजह से निगम प्रशासन प्रॉपर्टी टैक्स वसूली में पिछड़ता जा रहा है। इससे निगम की आर्थिक हालत कमजोर होती जा रही है। वहीं, निगम प्रशासन लगातार प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली के हरसंभव प्रयास कर रहा है। निगम फिलहाल छूट देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स जमा कराने की सुविधा दे रहा है। बावजूद इसके प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के संतोषजनक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। 30 जुलाई तक मिलने वाली छूट सितंबर तक बढ़ा दी गई है। आठ काउंटरों पर टैक्स जमा कराया जा रहा है। इसके अलावा लोगों की मदद के लिए भी एक अतिरिक्त काउंटर खोला गया है।
कोरोना के कारण समय पर नहीं बंटे बिल
प्रॉपर्टी टैक्स बिलों का वितरण एजेंसी से कराया जाता है। अप्रैल व मई में कोरोना की वजह से बिल नहीं बंट सके। जून में बिलों का वितरण हुआ, मगर रफ्तार से नहीं। जुलाई से बिल वितरण में तेजी आई।
कोरोना में लगे लॉकडाउन की वजह से प्रॉपर्टी टैक्स की संतोषजनक वसूली नहीं हो सकी। अब छूट का लाभ लेने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने आ रहे हैं। बिलों का वितरण देरी से होने की वजह से भी दिक्कत आई है।
- जगदीश शर्मा, मुख्य कराधान अधिकारी, नगर निगम