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स्टेट यूनिवर्सिटी : धरातल पर फेल, कागजों में चल रहा खेल 

Mon, 21 Mar 2016 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
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स्टेट यूनिवर्सिटी - फोटो : file photo
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पीएम मोदी ने देश में स्वच्छता की अलख जगाई तो सामाजिक संस्थाओं के साथ शैक्षणिक संस्थाएं भी आगे आईं। इसके बाद चला जगह-जगह स्वच्छता अभियान चलाने का दौर। कुछ जगहों पर तो इस अभियान का असर साफ देखा गया, हालांकि कुछ जगह सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सिमट गया यह बहु उपयोगी अभियान।
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आला अधिकारियों के आदेशों के बाद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफार्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स ने भी कागजी खानापूर्ति के लिए पांच गांव गोद ले लिए। लेकिन इनमें धरातल पर कितना काम हुआ, गांव में कितनी जागरूकता फैलाई गई, इसकी पोल गांव पहुंचते ही खुल जाती है। ग्रामीण तो छोड़ो सरपंचों को भी पता नहीं है कि उनके गांव को गोद लिया गया है। यूनिवर्सिटी की टीम के गांव में जाकर जागरूकता अभियान चलाने की बात सोचना भी बेईमानी है।

दरअसल, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफार्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स ने पीएम मोदी की पहल पर पिछले वर्ष पांच गांव गोद लिए थे। इसमें लाढ़ौत, मकड़ौली खुर्द, मकड़ौली कलां, बैयापुर और धामड़ शामिल हैं। गांवों को गोद लेकर उनमें क्या करना है और एजेंडा क्या रहेगा? इसके लिए डायरेक्टर जनरल टेक्निकल एजुकेशन की तरफ से बाकायदा लिखित आदेश भी दिए गए थे। इस कार्ययोजना को सिरे चढ़ाने के लिए टीम भी बनाई गई थी। इन गांवों में जमीनी स्तर पर कितना सुधार हुआ यह जानने के लिए अमर उजाला टीम ने रविवार को मकड़ौली खुर्द और लाढ़ौत का दौरा किया। गांव के हालात देखकर तो यही कहा जा सकता है कि यूनिवर्सिटी शायद यह गांव गोद लेकर भूल गई है।
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हालात इससे ज्यादा बुरे क्या होंगे कि गांव के सरपंच से लेकर आम आदमी भी यह नहीं जानता कि उनका गांव किसने गोद लिया है, क्या योजनाएं बनीं और कितने पर अमल हुआ। यह स्थिति तो केवल दो गांवों की है, अन्य गांव के हालात क्या होंगे इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

गांवों में यह करने थे कार्य
डायरेक्टर जनरल टेक्निकल एजुकेशन की तरफ से जारी आदेश के अनुसार गोद लिए गए गांवों को आदर्श गांव के रूप में तैयार करना था। गांव में तीन से सात हजार हजार तक आबादी होनी चाहिए। इन गांवों में सोशल, इकोनॉमिक डेवलपमेंट, महिला जागरूकता, लिंगानुपात, स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम और ग्रामीणों को पढ़ाई के साथ स्वच्छता के लिए भी जागरूक करना था। इसके अलावा ग्राम सभा की मीटिंग में भी भाग लेना जरूरी था। 

मकड़ौली खुर्द के ग्रामीण बोले
गांव को किसी ने गोद लिया है इसकी तो हमें कोई जानकारी नहीं है। न ही गांव में आज तक हमने ऐसी कोई टीम देखी, जिसने कुछ विकास या सामाजिक कार्य में योगदान किया हो। 
- राजेश।

सुनने में तो आया था कि गांव को किसी ने गोद लिया है, लेकिन गांव में कभी कोई व्यक्ति नहीं आया। 
- सुरेंद्र।

गांव में काफी समस्याएं हैं। यूनिवर्सिटी ने कभी गांव की समस्या का समाधान तो दूर, बल्कि गांव में आकर भी नहीं देखा। 
- रणधीर।
 
हमारे गांव को गोद लिया हुआ है यह तो हमें आज पता चला। कागजों में गांव को गोद लेने का क्या फायदा? गांव में कभी ऐसी कोई टीम देखी ही नहीं। 
- जसमेर।

सरपंच को भी पता नहीं
गांव के लोग सफाई को लेकर कम जागरूक हैं। स्वच्छता और सफाई के लिए सभी को जागरूक होना होगा। यूनिवर्सिटी ने गांव को गोद लिया इसकी मुझे अभी तक कोई जानकारी नहीं है। न ही यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई जानकारी दी गई। 
- सुमित आर्य, सरपंच मकड़ौली खुर्द। 

यह बोले लाढ़ौत के ग्रामीण
गांव में समस्याओं के अंबार है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। टीम ने आकर कभी किसी को जागरूक नहीं किया। 
- प्रदीप।

गांव में जागरूकता का अभाव है। यदि किसी ने गांव गोद लिया है तो गांव में आकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। 
- अमरजीत।

हमें तो अभी तक यह ही नहीं पता था कि गांव को गोद लिया हुआ है। टीम तो कभी गांव में देखी नहीं है। फिर तो यूनिवर्सिटी ने कागजों में ही गांव को गोद लिया होगा। 
- भगीरथ और अमित 

गांव गोद लेने की जानकारी मुझे नहीं है और न ही यूनिवर्सिटी की टीम को गांव में देखा। यदि ऐसा है तो अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। 
- मंजीत, सरपंच लाढ़ौत।


जल्द गांवों में जाएगी टीम
यूनिवर्सिटी ने कुछ गांव गोद ले रखे हैं। समय-समय पर इनकी विजिट करने के लिए विश्वविद्यालय की टीम जाती भी रही है। परीक्षा के बाद विद्यार्थियों की टीम बनाकर गांव भेजी जाएगी जो जागरूकता अभियान चलाएगी। 
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डीएस कपूर, डीन।
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