रोहतक। पांच-साढ़े पांच मीटर का सुंदर सा कपड़ा जब महिलाएं विशिष्ट अंदाज में पहनती है तो यह साड़ी का रूप ले लेता है। आन-बान शान और पूरी ठसक के साथ लहराता साड़ी का आंचल एक ओर परंपरा तो दूसरी ओर फैशन का परचम बन जाता है।
रोहतक का शोरी मार्केट यहां हर तरह के रंग, डिजाइन व कीमत की साड़ियों के लिए प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहां से हरियाणा के विभिन्न बाजारों में साड़ियां सप्लाई हो रही हैं। यहां 200 से दो लाख रुपये तक की साड़ियां मौजूद हैं।
समय के साथ जैसे-जैसे महिलाओं की जीवनशैली में परिवर्तन हुआ है, कपड़ों के चयन पर भी इसका असर पड़ा रहा है। साड़ी पहनने में कुछ ज्यादा वक्त लगता है। इसका रखरखाव भी थोड़ा मुश्किल है। इसे संभालने में भी नई पीढ़ी की थोड़ी दुश्वारी लगती है। यही वजह है कि यह नई पीढ़ी के लिए रोजमर्रा की जगह त्योहारी एवं खास मौकों पर पहने जाने वाला परिधान बन कर रहा गया है। इसके बाद भी चाहें जितने भी आधुनिक कपड़े चलन ट्रेड में आ जाएं साड़ी का आकर्षण और भव्यता कम नही हुई है। साड़ी पहनने का अपना एक अलग ही रिवाज हैं। आज के इस आधुनिक दौर में जब इंडो वेस्टर्न अधिक चलन में है ऐसे में युवतियों को ट्रेडिशनल साड़ियां अधिक पसंद आ रहीं हैं।
आधुनिकता के दौर में हर जगह बदलाव आया है। साड़ियों का हब कहा जाने वाले शोरी मार्केट में साड़ियों के नए-नए डिजाइन देखने को मिलते हैं। युवतियां पुराने डिजायन अधिक पसंद कर रही हैं। शहरभर के तमाम साड़ी शोरूमों पर ट्रेडिशनल साड़ियों की डिमांड एकदम से बढ़ी गई है। नई ट्रेंड के साड़ियों को अब पुराने खूबसूरत डिजाइन की साड़ियां टक्कर दे रहीं हैं।
बनारसी साड़ियों की मांग बढ़ी
शोरी मार्केट स्थित दुकानदार ने बताया कि दिनों ट्रेडिशनल बनारसी साड़ी जिम्मी चू की मांग अधिक है। लड़कियां अपने फोन में पुरानी साड़ियों के फोटो दिखा कर वैसी ही साड़ी की मांग कर रहीं हैं। बनारसी साड़ी सबसे पुरानी और पारंपरिक साड़ियों में से एक है।
50 हजार तक की साड़ी खरीद रहीं लड़कियां
बीते दिनों सावे हालग खत्म हुए हैं। उन दिनों लड़कियों ने 50 हजार रुपये तक की साड़ियां पसंद की हैं। सावे के सीजन में 50 हजार रुपये तक की साड़ियों को युवतियों ने पसंद किया व खरीदा।