म्यूजिक बज रहा था, रैंप सजा था और उस पर कैटवॉक भी हो रहा था। लेकिन उस चलने वाले कोई मॉडल नहीं थे, बल्कि गाय, सांड़ और बैल कैटवॉक कर रहे थे। यह नजारा बहुअकबरपुर गांव के आईआईवीईआर कॉलेज में हुई राज्यस्तरीय दुग्ध एवं सौंदर्य प्रतियोगिता में शनिवार को देखने को मिला। पहले दिन शुक्रवार को दुग्ध एवं अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं थी।
सरकार की ओर से पहली बार बहुअकबरपुर के वेटरनरी कॉलेज में राज्यस्तरीय दुग्ध एवं सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में पहले दिन दुग्ध एवं अन्य प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें देसी गाय का दूध व सांड़ की कद-काठी हर कोई देख रहा था। दूसरे दिन शनिवार शाम को रैंप पर गाय, सांड़ और बैलों ने कैटवॉक किया। इस प्रतियोगिता को देखने के लिए खुद कृषि एवं पशुपालन मंत्री ओपी धनखड़, बहादुरगढ़ विधायक नरेश कौशिक, पशुपालन विभाग के डीजी जीएस जाखड़, प्रमुख सचिव अभिलक्ष लिखी समेत अन्य लोग पहुंचे थे। रैंप पर सबसे पहले हरियाणा नस्ल की गाय ने कैटवॉक की। उसके बाद हरियाणा नस्ल का सांड़ तो फिर हरियाणवी गाय को कैटवॉक के लिए रैंप पर उतारा गया। फिर हिसार के हांडी खेड़ा के बैलों का जोड़ा रैंप पर उतरा। इसके बाद दोबारा से रोहतक के बिजेंद्र का बैलों का जोड़ा रैंप पर आया। खुराना डेयरी रोहतक की साहीवाल नस्ल की गाय, करनाल के राजवीर की साहीवाल गाय, खुराना डेयरी का साहीवाल सांड़, करनाल की थारपारकर नस्ल की गाय, सोनीपत की गिर नस्ल की गाय, सिरसा की थारपारकर नस्ल की गाय, झज्जर के धूपसिंह की हरियाणा नस्ल की गाय ने कैटवॉक किया। इसके बाद कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने अलग-अलग श्रेणी में जीतने वाली गाय, सांड़ और बैलों के मालिकों को पुरस्कार दिए।
बाबा रामदेव बाजार पर कब्जा ना कर लें, देसी गाय के दूध-घी का बाजार बढ़ाओ
देसी गाय के दूध और घी की पूरे देश में मांग है, लेकिन हम इसका बाजार नहीं बढ़ा पा रहे हैं। यही कारण है कि बाबा रामदेव अकेले ही पूरे बाजार पर कब्जा करने में लगे हैं। इसलिए देसी गाय के दूध और घी का बाजार बढ़ाओ, जिससे बाबा रामदेव बाजार पर कब्जा ना कर सकें। प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री ओपी धनखड़ ने कुछ इस तरह बाबा रामदेव की पतंजलि के बढ़ते बाजार पर चुटकी ली।
मंत्री ओपी धनखड़ शनिवार को राज्यस्तरीय गौवंश दुग्ध एवं सौंदर्य प्रतियोगिता में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने गाय के घी एवं दूध को बढ़ावा देने के लिए पशुपालकों और लोगों को तरह-तरह के उदाहरण देकर समझाया। धनखड़ ने कहा कि भारी पेट वाला आदमी को देखकर साफ पता चल जाता है उसने भैंस का झाकरा बांध रखा है। भैंस के दूध से फैट बढ़ता है और आदमी मोटा हो जाता है। देसी गाय का घी खाने वाला हीरो-हीरोइन की तरह स्लिम ट्रिम रहता है। ऐसे ही दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद, मुंबई में महिलाएं स्लिम ट्रिम रहने के लिए गाय का घी खाती है। इसलिए गाय के घी एवं दूध का बाजार विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक साल में गाय के दूध एवं घी का उत्पादन 2 करोड़ से बढ़ाकर 2.5 करोड़ लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अपनी गौ भक्ति को गौ शक्ति में बदलना होगा, जिससे प्रदेश की हर गौशाला व पशुपालक गौसंवर्धन का केंद्र बने। उनके अनुसार वीटा के कुरुक्षेत्र प्लांट को भी गौ-दुग्ध व उससे तैयार होने वाले उत्पादों के लिए समर्पित कर दिया गया है।
मिस्र की यात्रा में मिला कामधेनु का जिक्र
ओपी धनखड़ ने अपनी मिस्त्र यात्रा जिक्र करते हुए कहा कि वहां पांच हजार वर्ष पुरानी सभ्यता में भी कामधेनु का जिक्र मिलता है। मिस्र के लोग मानते हैं कि उनके देश में गाय को केवल मंदिर में माता का दर्जा दिया जाता है, जबकि बाहर उसे पशुधन माना जाता है। भारत में मंदिर व उससे बाहर भी माता का दर्जा दिया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने गौवंश पर आधारित सीडी का विमोचन भी किया।
देवी लाल ने ऊंटनियां की पेंशन ना कराई, हमने गायों की करा दी
धनखड़ ने चुटकी लेते हुए कहा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल ने कहा था कि मैं ऊंटनियां की भी पेंशन करा दूंगा। वे ऐसा नहीं कर पाए, लेकिन हमने गायों की पेंशन करा दी। इस प्रतियोगिता में 21 हजार रुपये का इनाम दिया जा रहा है, जो पेंशन से कम नहीं है।