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डॉक्टर बने 'देवदूत': पांच घंटे तक ऑपरेशन कर युवक की छाती में धंसे सरिये निकाले, जीवन बचाने में जुटी 5 डॉक्टरों की टीम

Mon, 01 Nov 2021 02:18 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक(हरियाणा)

सार

युवक बाइक से कहीं जा रहा था, सड़क हादसे में उसके शरीर में करीब 40 फुट लंबे दो सरिये आरपार हो गए। उसे खानपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, यहां से उसे गंभीर हालत के चलते पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया।
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युवक की छाती में आरपार धंसे सरिये। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छाती में आरपार धंसे सरिये। खून से लथपथ शरीर। दर्द से चीखता 18 वर्षीय कर्ण। यह दृश्य किसी का भी दिल दहला सकता है। हरियाणा के रोहतक पीजीआई में जिसने भी यह देखा वह उफ... करने से खुद को रोक नहीं पाया। इस नाजुक घड़ी में पीजीआई के पांच वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने पांच घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद युवक की छाती से सरिये निकालकर न केवल मरीज का जीवन बचाया, बल्कि चिकित्सकों की छवि एक बार फिर भगवान में रूप में साकार करने का काम किया। इस सफल ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य विज्ञान विवि की कुलपति डॉ. जी. अनुपमा, डीएमईआर डॉ. शालिन व पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर सिंह ने टीम को सराहा है।

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दरअसल, गन्नौर निवासी 18 वर्षीय युवक 29 अक्तूबर को बाइक से कहीं जा रहा था। सड़क पर हुए हादसे में उसके शरीर में करीब 40 फुट लंबे दो सरिये आरपार हो गए थे। आसपास के लोगों ने सरिये काटकर छोटा किया और उसे खानपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। यहां से उसे गंभीर हालत के चलते पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। परिजन उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि सरिये छाती के दाहिने हिस्से में पैरा स्टर्नल में घुसे हैं।

इसके चलते तुरंत कार्डियोथोरेसिक सर्जरी टीम को बुलाया गया। संस्थान के कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस लोहचब ने मौके पर पहुंच कर मरीज की स्थिति का आंकलन किया। मरीज होश में था, लेकिन उसके न तो एक्सरे करवाए जा सकते थे और न ही सीटी स्कैन कराना संभव था। शरीर में सरिये धंसे होने के चलते मरीज लेट पाने में भी असमर्थ था। इस चुनौती भरी परिस्थिति में चिकित्सकों ने किसी फिल्म की तरह बने इस दृश्य को देखकर हैरत के साथ ऑपरेशन की तैयारी शुरू की। 
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कार्डियक सर्जरी ओटी में हुआ ऑपरेशन 
कार्डियक सर्जन डॉ. एसएस लोहचब ने बताया कि वर्ष 2013 में इस प्रकार का एक ऑपरेशन पहले कर चुका हूं। इस तरह के ऑपरेशन का बड़ा अनुभव रखने वाले कार्डियक सर्जन ने कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. नवीन मल्होत्रा से बात की। दोनों की तुरंत ऑपरेशन पर सहमति बनी। इसके चलते मरीज को ट्रॉमा सेंटर से कार्डियक सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। यहां मरीज को अत्यधिक रक्त स्राव होने की स्थिति में हार्ट लंग मशीन की जरूरत होने की आशंका थी। इसलिए ऑपरेशन की कार्डियक ओटी का चुना गया। 

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काट कर निकाले गए सरिये 
डॉ. इंदिरा मलिक ने बताया कि मरीज को एनेस्थीसिया देकर मशीन से छाती में धंसे सरिये काटे गए। सरिये छोटे करने के बाद उन्हें शहरी से बाहर निकाला गया। इन सरियों की वजह से फेफडे़ में 4 जगह चोट आई। इन चोटों को स्टेपल मशीन से स्टेपल किया गया। ऑपरेशन में उनके अलावा डॉ. एसएस लोहचब, डॉ. नवीन मल्होत्रा, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. फ्रेंकलीना भी शामिल रहे। ऐसे मामलों में शरीर में घुसी छड़ों को हटाने या हिलने डुलने से बचना चाहिए। इससे घातक रक्त स्राव होने की आशंका रहती है। इस तरह के रोगी को इलाज के लिए अच्छे अस्पताल में सामान्य सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी व कार्डियक एनेस्थीसिया की संयुक्त टीम की आवश्यकता होती है। ऐसी जटिल सर्जरी के लिए ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधा वाला ऑपरेशन थियेटर होना बेहतर है। 

इंपेयरमेंट इंजरी प्रबंधन रहा चुनौतीपूर्ण 
कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. नवीन मल्होत्रा ने कहा कि इस जटिल ऑपरेशन की टीम में शामिल होना एक मरीज का जीवन बचाने का अवसर मिलना रहा। उन्होंने कहा कि मरीज के फेफड़ों से हवा का रिसाव नहीं हुआ था। इस कारण मरीज बगैर किसी तकलीफ के सांस लेता रहा। एक्सरे में फेफड़े सामान्य दिखाई दिए। चिकित्सकों की टीम ने करीब 5 घंटे से अधिक चले इस ऑपरेशन में इंपेयरमेंट इंजरी का प्रबंधन अत्यधिक चुनौतीपूर्ण रहा। अधिकांश रोगी छाती की चोट के चलते मौके पर ही दम तोड़ जाते हैं। 
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